Category: रचनाकार

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हम गाँव देहात चले हैं..

जिन शहरों को बनाने-बसाने में मजदरों ने खून पसीना बहाया.. सबकुछ पीछे छोड़कर चिलचिलाती धूप में सिर पर गठरी लादे साथ में नन्हें बच्चों का हाथ थमे जलती तपती सड़क पर नंगे पैर वापस...

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माँ और मैं: कौशल्या हैं वो कलियुग में भी – जीवित-जागृत, मूर्त-मिसाल

मदर्स डे पर विशेष “मां” समस्त ब्रह्मांड में इससे बढ़ा कोई शब्द नहीं है। मां के लिए बच्चे क्या होते हैं और बच्चों के लिए मां क्या होती है.. कवि सौरभ तिवारी की इस...

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जो भूल हुई है हम सबसे वो भूल नहीं दोहराना तुम

पृथ्वी दिवस पर विशेष पृथ्वी दिवस पर नई पीढ़ी से दुनिया को बचाने की अपील करती कवि संजीव जैन की कविता जो भूल हुई है हम सबसे वो भूल नहीं दोहराना तुम धरती आकाश...

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गांवों की तरफ लौटते भूख से तड़पते प्रवासी मजदूरों की व्यथा

परिंदे और प्रवासी मजदूर कैलाश सत्यार्थी: नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी लॉकडाउन से बेरोजगार हुए प्रवासी मजदूरों और उनके बच्चों को लेकर चिंतित हैं। उनकी मदद के...

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फिर इन्द्र धनुष उगेगा, उसके रंगों से होली खेलेंगे

होली पर विशेष होली पर शांति की कामना करती नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की कविता हर साल होली पर उगते थे इंद्र धनुष दिल खोल कर लुटाते थे रंग मैं उन्हीं रंगों...

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पीले रंग शुभ बन कर छा जाना, सबको अपने गले लगाना…

होली पर विशेष होली के त्यौहार पर लाल, पीले, नीले, हरे रंगों के जरिए सबको गले लगाने का संदेश देती कवि संजीव जैन की रचना सबको अपने गले लगाना इन्द्रधनुष के रंग ख़ुशियों में,...

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गणेशशंकर विद्यार्थी के अनसुने पहलुओं को सामने लाती पत्रकार अमित राजपूत की पुस्तक

भारतीय जनसंचार संस्थान के हिंदी पत्रकारिता के छात्र रहे अमित राजपूत ने गणेशशंकर विद्यार्थी को ‘अंतर्वेद प्रवर’ यानी दोआब का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति कहकर पुकारा है। युवा रचनाकार अमित राजपूत की पुस्तक ‘अंतर्वेद प्रवरः गणेशशंकर विद्यार्थी’...

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बड़ी लंबी है तेरे साथ तमन्नाओं की बात

कवि, कहानीकार, गीतकार, गायक नीतीश्वर कुमार के पहले कविता संग्रह ‘कह दो ना’ का विमोचन पुराने और नए को जोड़ने का नीतीश्वर कुमार का अपना अलग ही अंदाज़ है। अमीर ख़ुसरो हों या रूमी,...

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आध्यात्मिक लेखन से आईएएस अफसर को मिली अलग पहचान

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे सुरेश कुमार सिंह ने आस्था आधारित रचनात्मकता को नए आयाम दिए। शाक्त चिंतन और लेखन ने उनकी जीवन-धारा बदली। अब तक सुरेश कुमार सिंह की 16 से भी...

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राहुल गांधी के झूठ की पोल खोलती ‘बोफोर्स नहीं राफेल है’

पेशे से पत्रकार जितेंद्र चतुर्वेदी ने गहरे शोध के बाद ये किताब लिखी है। ये किताब कांग्रेस और राहुल गांधी के झूठ की पोल तो खोलती है। पत्रकारिता से समझौता कर कांग्रेस के पक्ष...

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