Category: रचनाकार

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‘मनकही’ कुलदीप की, जैसे जिया, जितना देखा समझा, लिखते गए

यतींद्र मिश्र: कुलदीप का संग्रह ‘मनकही’ कई संदर्भों में पूर्वज कविता परंपरा से सम्मानजनक दूरी बरतते हुए एक ऐसे समय प्रदेश में अटका हुआ पड़ा है जहां से संवेदना और सरोकारों के अंतर्द्वंद परखे...

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एक शहर इलाहाबाद से एक युवा के IRS अफसर बनने की रोमांचक दास्तान

रचनाकारों की नजर में IRS अफसर अंजनी कुमार पाण्डेय की रचना ‘इलाहाबाद ब्लूज’ अंजनी की किताब उत्तर प्रदेश प्रतापगढ़ की गंवई ज़मीन से शुरू होकर इलाहाबाद होते हुये यूपीएससी, धौलपुर हाउस, दिल्ली तक के...

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आपकी अपनी आपबीती है “इलाहाबाद ब्लूज”

राजनेता, वैज्ञानिक, सिविल सर्विसेज अधिकारी, साहत्यिकार, आध्यात्मिक गुरुओ, अखाड़ों, कुंभ, अदालती मुकदमों की धरती इलाहाबाद की बकैती बहुत मशहूर है। कई बार इस बकैती का स्तर ऐसा कि बड़े-बड़े साहित्यकार भी मात खा जाएं।...

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योग दिवस पर पीएम मोदी पर vBook ‘लॉर्ड ऑफ रिकॉर्ड्स’ सामने आएगी

योग दिवस  के अवसर पर इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA)कर रहा है पीएम मोदी पर vBook की लॉन्चिंग, देशभर के कुलपति और बुद्धिजीवी करेंगे परिचर्चा योग दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय...

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हम गाँव देहात चले हैं..

जिन शहरों को बनाने-बसाने में मजदरों ने खून पसीना बहाया.. सबकुछ पीछे छोड़कर चिलचिलाती धूप में सिर पर गठरी लादे साथ में नन्हें बच्चों का हाथ थमे जलती तपती सड़क पर नंगे पैर वापस...

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माँ और मैं: कौशल्या हैं वो कलियुग में भी – जीवित-जागृत, मूर्त-मिसाल

मदर्स डे पर विशेष “मां” समस्त ब्रह्मांड में इससे बढ़ा कोई शब्द नहीं है। मां के लिए बच्चे क्या होते हैं और बच्चों के लिए मां क्या होती है.. कवि सौरभ तिवारी की इस...

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जो भूल हुई है हम सबसे वो भूल नहीं दोहराना तुम

पृथ्वी दिवस पर विशेष पृथ्वी दिवस पर नई पीढ़ी से दुनिया को बचाने की अपील करती कवि संजीव जैन की कविता जो भूल हुई है हम सबसे वो भूल नहीं दोहराना तुम धरती आकाश...

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गांवों की तरफ लौटते भूख से तड़पते प्रवासी मजदूरों की व्यथा

परिंदे और प्रवासी मजदूर कैलाश सत्यार्थी: नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी लॉकडाउन से बेरोजगार हुए प्रवासी मजदूरों और उनके बच्चों को लेकर चिंतित हैं। उनकी मदद के...

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फिर इन्द्र धनुष उगेगा, उसके रंगों से होली खेलेंगे

होली पर विशेष होली पर शांति की कामना करती नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की कविता हर साल होली पर उगते थे इंद्र धनुष दिल खोल कर लुटाते थे रंग मैं उन्हीं रंगों...

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पीले रंग शुभ बन कर छा जाना, सबको अपने गले लगाना…

होली पर विशेष होली के त्यौहार पर लाल, पीले, नीले, हरे रंगों के जरिए सबको गले लगाने का संदेश देती कवि संजीव जैन की रचना सबको अपने गले लगाना इन्द्रधनुष के रंग ख़ुशियों में,...

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