Category: ओपिनियन

0

दूरगामी बजट पर आर्थिक सुस्ती से निकलने में फौरी मदद की संभावना नहीं

कराधान समेत कई मुद्दों पर निराश करता मोदी 2.0 सरकार का बजट 2020 ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दूरगामी सोच लिए है। इस बजट से अर्थव्यवस्था में सुस्ती टूटने के फौरी आसार तो नहीं है… लेकिन...

0

CAA और NRC पर भ्रम और सत्य का मंथन

जहाँ अन्य विश्वविद्यालयों में CAA और NRC पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है, वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी के CPDHE डिपार्टमेंट में डॉ गीता सिंह के निर्देशन में CAA और NRC को लेकर समाज मे फैले...

0

राष्ट्रीय युवा दिवस: युवाओं के विवेकानंद

निखिल यादव: स्वामी विवेकानंद और उनके शब्द ज्ञान और जीवन के व्यावहारिक पाठों से इतने समृद्ध थे कि प्रसिद्ध विद्वान और नोबेल पुरस्कार विजेता, रवींद्रनाथ टैगोर ने एक बार कहा था, “यदि आप भारत...

0

जब नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने चाय की दुकान खोली

कैलाश सत्यार्थी के नोबेल शांति पुरस्कार की 5वीं वर्षगांठ पर विशेष अरविंद कुमार: कैलाश सत्यार्थी को पांच साल पहले आज ही के दिन 10 दिसंबर 2014 को बाल श्रम के खिलाफ और बच्चों के...

0

आखिर वे कौन सी घोषणाएं हैं जिससे व्यापार जगत इतना खुश है

व्यापार व उद्योग जगत पिछले कुछ महीनों से अर्थव्यवस्था में मंदी की आहट से परेशान था और सरकार से राहत की मांग कर रहा था। उनकी मांग व समस्याओं को ध्यान में रखते हुए...

0

क्या वाकई गांव, गरीब और किसान के लिए है बजट 2019

मोदी – 02 सरकार का बही खाता यानी बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने दावा किया कि बजट 2019 गांव, गरीब और किसान को ध्यान में रखकर बनाया गया है। ऐसे...

1

आम चुनाव 2019 में क्या रही महिलाओं की स्थिति

आम चुनाव 2019 में देशभर से मतदाताओं ने 78 महिलाओं को चुनकर लोकसभा भेजा है। आजादी के बाद लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी का ये अब तक का सबसे उच्चतम आंकड़ा है। साथ ही 9...

0

होती हैं सब मांए जैसी मेरी मां भी वैसी है

मदर्स डे पर विशेष मदर्स डे पर मां की ममता, मां की महिमा, मां की गरिमा बताती कवि संजीव जैन की कविता मां जंगल में उद्यानों में माँ तेरी चुनरी हरियाली है। खेतों में...

0

“बाल समिति” यानी राजधानी दिल्ली में बच्चों की हक की आवाज भी और मनोरंजन भी

बच्चों की समस्याओं को हल करने के लिए हमे उन्हें सिस्टम में शामिल करना होगा। उन्हें केवल ‘बच्चा है’ समझ कर छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। यह कहकर कि इस शहर में तो...

0

समय आस के दीप जलाना.. नयी सुबह कुछ ऐसे आना..

मज़दूर दिवस पर विशेष मजदूर दिवस पर समय से दुनिया भर के मजदूरों के लिए “नयी सुबह कैसी हो” की कामना करती कवि संजीव जैन की रचना श्रम अगर अभाव है मजबूरी है। सुख...

Skip to toolbar