Category: ओपिनियन

0

बच्‍चों के “भाईसाहब” कैलाश सत्‍यार्थी

संध्या:  चार दशकों से बच्‍चे सत्‍यार्थी के सरोकार और उद्देश्‍य बने हुए हैं। उनके कर्तव्‍य और नैतिक बल भी बच्चे हैं। उन्‍होंने बच्‍चों के सपनों को अपने सपनों से जोड़ लिया है। और बच्‍चों...

0

आखिर क्या है जेएनयू में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के मायने

निखिल यादव//पुष्कर पांडेय:  आज जेएनयू के लिए ऐतिहासिक दिन है। आज इस विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण हो रहा है, जिनके अध्यात्म और राष्ट्रवाद ने भारत को दिशा दिखाई। युवाओं को...

0

स्वामी विवेकानंद से प्रभावित आयरलैंड की 17 साल की मार्गरेट बन गई भगिनी निवेदिता

निखिल यादव: भगिनी निवेदिता का जीवन त्याग, सेवा और समर्पण का जीवन है। आयरलैंड में जन्मी और इंग्लैंड के लंदन शहर में मात्र 17 वर्ष की उम्र में शिक्षिका बनने वाली, लंदन की बौद्धिक...

1

धरती को बचाना है तो कोरोना काल के सबक याद रखें

निखिल यादव: प्रकृति अगर भयावह रूप ले लेती है तो मनुष्य का उसके सामने कोई अस्तित्व नहीं रह जाता है। इसका उदाहरण हमने कई बार देखा है। वर्ष 2020 में तो सम्पूर्ण विश्व ने...

0

किसानों की आजादी नहीं गुलामी और बर्बादी का परवाना हैं किसान बिल

किसानों की आजादी देने का ढिढोरा पीटने वाला मोदी सरकार का काला कानून वास्तव में किसानों की गुलामी और बर्बादी का परवाना है। एफसीआई की चोरी रोकने, वेयरहाउस बनाने, सप्लाई चेन सुधारने की बजाय...

0

मीडिया शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मीडिया एजुकेशन काउंसिल की जरूरत

“मीडिया शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मीडिया एजुकेशन काउंसिल की आवश्यकता है। इसकी मदद से न सिर्फ पत्रकारिता एवं जनसंचार शिक्षा के पाठ्यक्रम में सुधार होगा, बल्कि मीडिया इंडस्ट्री की जरुरतों के अनुसार...

0

127 साल बाद भी आज भी क्यों प्रासंगिक स्वामी विवेकानंद का शिकागो संबोधन

शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में 11 सितम्बर, 1893 को दिए गए स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण को आज 127 वर्ष हो गए हैं, लेकिन आज भी इस भाषण की प्रासंगिकता उतनी ही...

0

कोरोना महामारी में दुनिया के 40 करोड़ से अधिक बच्‍चे ऑनलाइन शिक्षा से वंचित

लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्‍ड्रेन समिट में जारी रिपोर्ट कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान दुनिया में बच्चों की बुरी स्थिति को करती है उजागर कोरोना महमारी की वजह से बच्चों पर मड़राते वैश्विक संकट पर...

0

बाल श्रम के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून बनवाने वाले कैलाश सत्यार्थी का संघर्ष जारी है

संध्या मिश्रा: जब पूरी दुनिया कोरोना महमारी के संकट से जूझ रही है, ऐसे में 4 अगस्त, 2020 के दिन बाल श्रम के खिलाफ आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। यह दिन...

4

उठिए! आगे बढ़िए सरकार! पहाड़ को पलायन से मुक्ति दिलाने का यही सही वक्त है

सौरभ पाण्डेय: मातृभूमि से पलायन शायद ही कोई मनुष्य स्वेच्छा से करना चाहेगा। मनुष्य जब विवश होता है तभी पलायन का मार्ग अपनाता है। उसके पास कोई विकल्प नहीं होता। कुछ समय पहले मैंने...

Skip to toolbar