Category: ओपिनियन

0

होती हैं सब मांए जैसी मेरी मां भी वैसी है

मदर्स डे पर विशेष मदर्स डे पर मां की ममता, मां की महिमा, मां की गरिमा बताती कवि संजीव जैन की कविता मां जंगल में उद्यानों में माँ तेरी चुनरी हरियाली है। खेतों में...

0

“बाल समिति” यानी राजधानी दिल्ली में बच्चों की हक की आवाज भी और मनोरंजन भी

बच्चों की समस्याओं को हल करने के लिए हमे उन्हें सिस्टम में शामिल करना होगा। उन्हें केवल ‘बच्चा है’ समझ कर छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। यह कहकर कि इस शहर में तो...

0

समय आस के दीप जलाना.. नयी सुबह कुछ ऐसे आना..

मज़दूर दिवस पर विशेष मजदूर दिवस पर समय से दुनिया भर के मजदूरों के लिए “नयी सुबह कैसी हो” की कामना करती कवि संजीव जैन की रचना श्रम अगर अभाव है मजबूरी है। सुख...

0

अगर आप टैक्सपेयर वेतनभोगी हैं तो फॉर्म 16 में हुए बदलाव के बारे में जरूर जानिए

कर्मचारियों द्वारा आय का गलत ब्यौरा देकर टैक्सचोरी के कई मामले सामने आए। इस तरह के फ्रॉड के बाद आयकर विभाग ने फॉर्म 16 में कई बदलाव किये। इसमें वेतन के अलावा भत्तों और...

0

अगर आप आयकर दाता हैं तो इसे जरूर पढ़ें

यदि आप आयकर दाता है और इस वर्ष आप पर आयकर रिटर्न्स भरने की जिम्मेदारी है तो आयकर विभाग इस बार नए प्रावधान और बदलाव लाया है। जिसकी वजह से अब और विस्तृत जानकारी...

0

क्यों देश भर के एकेडमिक्स कह रहे “एक बार फिर मोदी सरकार”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में बुद्धिजीवी एवं पढ़ लिखे तबकों के बीच एक महीने पहले शुरू हुए एकेडेमिक्स फॉर नमो अभियान में अब तक देश के करीब 300 शिक्षण संस्थानों के लगभग 1500...

0

अच्छी लड़की बन कर भी, क्या पाया तुमने

महिला दिवस पर विशेष महिला दिवस पर लड़कियों को लेकर समाज के चरित्र पर कविता की पंक्तियों के जरिए सवाल पूछती कवि संजीव जैन की रचना एक साँचे में, मत ढलना तुम। अच्छी लड़की,...

0

महाशिवरात्रि है, आओ शिव का ध्यान करें

    प्रो. राकेश कुमार उपाध्याय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी भूमि पर रखा पांव परंपरा है, आगे बढ़ने के लिए उठा हुआ पांव आधुनिकता है। धर्म और परंपरा का यह अखंड हिन्दू जीवन प्रवाह...

0

‘भारत माता-धरती माता’ की संकल्पना की दार्शनिक आधार भूमि

हम जब धरती माता अथवा उसे भारत माता कहते हैं तो उसी आदिशक्ति भवानी के सृजनात्मक रूप का स्मरण करते हैं क्योंकि संपूर्ण ब्रह्मांड के सृजन के पीछे उसके मातृस्वरूप को देखने की अनुभूति...

0

ऐसे कैसे बनेगी चाइल्ड फ्रेंडली सिटी जब बच्चे ही भागीदार नहीं?

गोर्की बक्शी: आजकल हम बच्चों को सुविधाओं के नाम पर पंगु बनाते जा रहे हैं। उनमें शारीरिक-मानसिक विकास का स्कोप केवल घर तक में ही सीमित कर दिया गया है और यह आंकड़ा शहरी...

Skip to toolbar