Tagged: पलायन

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हम गाँव देहात चले हैं..

जिन शहरों को बनाने-बसाने में मजदरों ने खून पसीना बहाया.. सबकुछ पीछे छोड़कर चिलचिलाती धूप में सिर पर गठरी लादे साथ में नन्हें बच्चों का हाथ थमे जलती तपती सड़क पर नंगे पैर वापस...

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