Tagged: लॉकडाउन 4.0

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प्रधानमंत्री मोदी का पैकेज किसान-गरीब-मजदूर को राहत या छलावा?

वित्त मंत्री की किसानों-मजदूरों के लिए 3.16 लाख करोड़ का ऐलान पूरी तरह से हवाई है। कागजी है। शब्दों का मकड़जाल मात्र है। इनमें ज्यादातर योजनाएं वर्षों से चल रही हैं। कुछ ऐसी हैं...

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हम गाँव देहात चले हैं..

जिन शहरों को बनाने-बसाने में मजदरों ने खून पसीना बहाया.. सबकुछ पीछे छोड़कर चिलचिलाती धूप में सिर पर गठरी लादे साथ में नन्हें बच्चों का हाथ थमे जलती तपती सड़क पर नंगे पैर वापस...

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सड़कों पर निकल पड़े मजबूर मजदूरों का गुनहगार कौन?

दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र से भारी तादाद में मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों को बगैर किसी इंतजाम के बाहर जाने देने की जिम्मेदारी किसकी बनती है? राकेश उपाध्याय: गुनाहों के देवता अपने गुनाहों का...

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