Tagged: Badalata India

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मैं झांसी का गढ़मऊ गांव हूं, जी हां मुझे झांसी पुलिस ने गोद लिया है

दिव्या वर्मा: एक पुलिस अफसर राहुल श्रीवास्तव की सोच से यूपी में एक गांव का पुर्नजन्म हुआ है। 26 जून को ट्विटर की चहचहाती दुनिया में इस गांव ने अपना अकाउंट खोला और खुद...

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नहीं, गृहणी होना कोई अभिशाप नहीं है..

क्या सिर्फ नौकरी करने वाली महिला ही कामकाजी है? गृहणी कामकाजी नहीं है? आखिर ऐसा क्यों है कि गृहणी खुद को कामकाजी महिलाओं की तुलना में कमतर समझती हैं? पढ़िए इस गंभीर विषय पर...

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क्या सोशल डिस्टेंसिंग के साथ भारत में जीना संभव है?

विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) पर विशेष मनु गौड़: कोरोनाकाल में पूरी दुनिया को समझ आ चुका है कि अब हमें कोरोना के साथ ही जीना होगा। फेसमास्क, सैनिटाइज़र और सोशल डिस्टेंसिंग अब मानव...

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बंगलों का सुख छोड़ गांव पहुंची अफसर की पत्नी, 5 साल में बदल दी तस्वीर

रुपांशु चौधरी: बड़े-बड़े बंगलों की सुख छोड़कर गांव की पगडंडियों में भटकना भला किसे अच्छा लगेगा। लेकिन जब जोश बदलाव का हो। जुनून लोगों की जिंदगी बदलने का हो। जज्बा जनता की सेवा का...

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कलेक्टर की पहल से दंतेवाड़ा की महिलाओं ने जिले में ही बना दिया हर्बल फिनायल

हिमांशी सारस्वत: कोरोना काल में साफ सफाई का जोर बढ़ने की वजह से हर्बल फिनायल महिलाओं को रोजगार दिलाने के लिए बहुत कारगर साबित हुआ है। महिलाएं अगर ठान लें और उन्हें प्रशासन का...

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दाल भात से प्रयागराज में 21 महीने से चल रहा भूख मुक्त भारत का संकल्प

आकाश सिंह: तीर्थों का राजा कहे जाने वाले प्रयागराज की महिमा अपरंपार है। प्राचीन काल में सम्राट हर्षवर्धन यहां हर 12 वर्ष पर लगने वाले कुंभ में दान करने के लिए आते थे। ईसा बाद...

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आपकी अपनी आपबीती है “इलाहाबाद ब्लूज”

राजनेता, वैज्ञानिक, सिविल सर्विसेज अधिकारी, साहत्यिकार, आध्यात्मिक गुरुओ, अखाड़ों, कुंभ, अदालती मुकदमों की धरती इलाहाबाद की बकैती बहुत मशहूर है। कई बार इस बकैती का स्तर ऐसा कि बड़े-बड़े साहित्यकार भी मात खा जाएं।...

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स्वामी विवेकानंद की दृष्टि में “आत्म निर्भर भारत”

स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर विशेष निखिल यादव: महामारी ने मनुष्य की जीवन जीने की शैली को ही नहीं बदला बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। कोरोना...

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बाल मित्र ग्राम के पूर्व बाल मजदूर नीरज मुर्मू ब्रिटेन के डायना अवार्ड से सम्मानित

कैलाश सत्‍यार्थी चिल्‍ड्रेन्‍स फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा संचालित गिरिडीह जिले के दुलियाकरम बाल मित्र ग्राम के पूर्व बाल मजदूर 21 वर्षीय नीरज मुर्मू को गरीब और हाशिए के बच्‍चों को शिक्षित करने के लिए ब्रिटेन...

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आचार्य बालकृष्ण : जैसा मैंने देखा

आचार्य बालकृष्ण किसी परिचय के मोहताज नहीं है। आयुर्वेद, जड़ी-बूटियों को लेकर उनकी जानकारियां अद्भुत हैं। उनके मैनेजमेंट स्किल के देश-विदेश के बड़े-बड़े संस्थान, बड़े-बड़े मैनेजमेंट गुरु मुरीद हैं। करीब 25 सालों से उन्हें...

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