RML दिल्ली में स्पाइनल इंजरी मरीजों को नई उम्मीद: व्हीलचेयर के साथ मिला खास प्रशिक्षण

हादसों या बीमारी की वजह से रीढ़ की हड्डी में लगी चोट (स्पाइनल कॉर्ड इंजरी) इंसानी जिंदगी को पलक झपकते ही बदल देती है। ऐसे मरीजों के थमे हुए कदमों को फिर से गति देने के लिए राजधानी के अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान (एबीवीआईएमएस) और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने एक नई और […]

हादसों या बीमारी की वजह से रीढ़ की हड्डी में लगी चोट (स्पाइनल कॉर्ड इंजरी) इंसानी जिंदगी को पलक झपकते ही बदल देती है। ऐसे मरीजों के थमे हुए कदमों को फिर से गति देने के लिए राजधानी के अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान (एबीवीआईएमएस) और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल ने एक नई और उम्मीद भरी पहल की है।

अस्पताल के शारीरिक आयुर्विज्ञान एवं पुनर्वास (पीएमआर) विभाग ने गैर-सरकारी संस्था ‘सक्षम – एक अभियान’ के साथ मिलकर 1 अगस्त 2026 को स्पाइनल कॉर्ड इंजरी से जूझ रहे मरीजों के लिए एक विशेष व्हीलचेयर वितरण, प्रशिक्षण और परामर्श शिविर का आयोजन किया। इस मानवीय पहल का सीधा उद्देश्य मरीजों को उपयुक्त व्हीलचेयर देकर उनकी आवाजाही को आसान बनाना, उन्हें दूसरों पर निर्भरता से मुक्ति दिलाना और उनके जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है

निदेशक ने बढ़ाया मरीजों का हौसला

कार्यक्रम का मार्गदर्शन अस्पताल की निदेशक डॉ. (प्रो.) अखिलेश्वरी प्रसाद ने किया। वे खुद कार्यक्रम में मौजूद रहीं, मरीजों से एक-एक करके बात की और उनकी समस्याएं जानीं। मरीजों का जज्बा देखकर उन्होंने अस्पताल के पीएमआर विभाग को निर्देश दिया कि ऐसे काउंसलिंग सेशन सिर्फ एक दिन के लिए न हों, बल्कि इन्हें नियमित रूप से आयोजित किया जाए।

💬 निदेशक डॉ. (प्रो.) अखिलेश्वरी प्रसाद:

“रीढ़ की हड्डी की चोट केवल शरीर को नहीं, बल्कि इंसान के आत्मविश्वास को भी तोड़ देती है। ऐसे में जब मरीज अपने जैसे दूसरे लोगों को आगे बढ़ते देखते हैं, तो उनका हौसला लौट आता है। अस्पताल में सहकर्मी परामर्श (पीयर काउंसलिंग) के नियमित सत्र होने चाहिए, ताकि मरीज शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से मजबूत होकर दोबारा समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।”

सत्र के मुख्य आकर्षण और ट्रेनिंग

अक्सर व्हीलचेयर मिलने के बाद भी सही जानकारी न होने से मरीज उसका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाते। इसीलिए इस कार्यक्रम में व्हीलचेयर बांटने के साथ-साथ व्यावहारिक ट्रेनिंग भी दी गई। इस शिविर में मुख्य रूप से इन अहम बिंदुओं पर ध्यान दिया गया:

व्हीलचेयर ट्रेनिंग और काउंसलिंग: मरीजों को व्हीलचेयर खुद से सुरक्षित चलाने का अभ्यास कराया गया, साथ ही सहकर्मी परामर्श (पीयर काउंसलिंग) के जरिए उनके मन का डर दूर किया गया

पुनर्वास की महत्ता: मरीजों के दैनिक काम आसान बनाने के लिए रीहैबिलिटेशन (पुनर्वास) के सही तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया गया

सुगम्यता और सामाजिक सहयोग: मरीजों के लिए बाधा रहित (सुगम) वातावरण तैयार करने और समाज में उनके सम्मानजनक जुड़ाव पर जोर दिया गया

आत्मनिर्भर जीवन: मरीजों को सही व्हीलचेयर देकर उनकी गतिशीलता और स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया गया

आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

स्पाइनल इंजरी के कारण व्यक्ति को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी परिजनों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में एबीवीआईएमएस और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की यह कोशिश उनके जीवन में एक नया सवेरा लेकर आई है

‘सक्षम – एक अभियान’ और अस्पताल के पीएमआर विभाग का यह साझा प्रयास साबित करता है कि अगर सही ट्रेनिंग, आधुनिक उपकरण और भावनात्मक सहारा मिले, तो व्हीलचेयर किसी मरीज की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी आजादी का जरिया बन सकती है