ओपिनियन
दंपत्ति और दाम्पत्य जीवन : संचित कर्मों का लेखा-जोखा
दांपत्य जीवन महज दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि जन्मों-जन्मों के संचित कर्मों और ऋणों का एक अनूठा संगम है। यह रिश्ता कभी परीक्षा तो कभी तपस्या की भांति होता है, जिसे केवल प्रेम, समर्पण और विश्वास की डोर से...
जलवायु परिवर्तन और बुजुर्ग: बढ़ते संकट के बीच जीवन बचाने की चुनौती
भारत तेजी से दो बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है। पहला, जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव और दूसरा, बुजुर्ग आबादी की लगातार बढ़ती संख्या। आमतौर पर इन दोनों मुद्दों पर अलग-अलग चर्चा होती है, लेकिन हकीकत यह है...
दुर्गम राहों से दिव्य दर्शन तक: बाबा केदारनाथ धाम की अविस्मरणीय यात्रा
केदारनाथ धाम की कठिन किन्तु आध्यात्मिक यात्रा केवल एक तीर्थ-दर्शन नहीं, बल्कि आस्था, साहस और आत्मानुभूति का अद्भुत संगम है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के बेहोशी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. भुवन चंद्र पाण्डेय अपने इस संस्मरण में बाबा...
पति-पत्नी का खट्टा-मीठा व दिव्य सम्बन्ध : समर्पण है सुख की चाबी
विवाह केवल एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम और समर्पण का पवित्र संगम है। पति-पत्नी का रिश्ता जीवन के हर उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का साथ निभाने की सच्ची परीक्षा है। आज के बदलते समय में इस रिश्ते को समझना...
सुखी जीवन का सरल मार्ग: माया-मोह और अहं या संस्कार एवं अध्यात्म?
आखिर सुखी जीवन क्या है? और इसे पाने का सरल मार्ग क्या है? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका जवाब हर व्यक्ति अपनी समझ और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर करता है। लेकिन ये समझ लीजिए कि सुखी जीवन का...
दहेज़ अपराध, उत्तराधिकार अधिकार है, बेटियों को हक़ से वंचित न करें
बेटियां केवल परिवार की शोभा नहीं, बल्कि समाज की बराबरी की धुरी हैं। दहेज़ अपराध है, जबकि कानून उन्हें पैतृक और अर्जित संपत्ति में बराबरी का अधिकार देता है। समाज को तय करना होगा—क्या वह न्याय और अधिकार के पक्ष...
गठबंधन की सियासत में भरोसे की नई ईबारत लिख रहे अखिलेश यादव
बिहार चुनाव में अखिलेश यादव गठबंधन की राजनीति का नया चेहरा बनकर उभरे हैं। बिना एक भी उम्मीदवार उतारे, अखिलेश यादव ने स्वयं और समाजवादी पार्टी के संगठन को महागठबंधन के पक्ष में झोंक दिया। अखिलेश यादव का यह कदम...
दूसरों से मिलने में मस्त हम, पर खुद से मिलने की लाइनें व्यस्त
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब दूसरों से तो रोज़ मिलते हैं, पर खुद से मिलने का वक्त नहीं निकाल पाते। इसी आत्ममंथन की संवेदनशील यात्रा में लेखक सौरभ पाण्डेय हमें दिखाते हैं — कैसे जिम्मेदारियों, परिवार और...
न्याय में देरी का शोर, पर सच्चाई कुछ और- न्यायपालिका पर नया दृष्टिकोण
भारतीय न्याय व्यवस्था पर प्रचलित भ्रांतियों और वास्तविकताओं के बीच का अंतर समझना आज बेहद ज़रूरी है। इस लेख के जरिए लेखक संजीव जैन ने अपने 33 साल के न्यायिक सेवा के अनुभव से इस जटिल विषय पर संतुलित दृष्टि...
90 फीसदी वंचित समाज के हक और आत्मसम्मान की पुकार है पीडीए
डॉ संजय लाठर उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर सामाजिक पुनर्संरचना की दिशा में आगे बढ़ रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष माननीय अखिलेश यादव का “पिछड़ा–दलित–अल्पसंख्यक (PDA)” फार्मूला अब प्रदेश की राजनीति में नई ऊर्जा और बहस लेकर...