सोशल मीडिया से जगाया सिस्टम पर भरोसा: शिकायत निवारण की मिसाल बने CRPF डीजी जीपी सिंह

CRPF के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने सोशल मीडिया को सिर्फ संवाद का मंच नहीं रहने दिया है। उन्होंने इसे जवानों और उनके परिवारों तक पहुंचने का एक जरिया बनाया है। खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर शिकायत सुनने के साथ-साथ वे लगातार जवानों को आधिकारिक शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करने के लिए भी […]

CRPF के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने सोशल मीडिया को सिर्फ संवाद का मंच नहीं रहने दिया है। उन्होंने इसे जवानों और उनके परिवारों तक पहुंचने का एक जरिया बनाया है। खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर शिकायत सुनने के साथ-साथ वे लगातार जवानों को आधिकारिक शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। इससे यह संदेश गया है कि बल के भीतर शिकायतों को सुनने और उन पर कार्रवाई करने की व्यवस्था मौजूद है और काम कर रही है। हाल के महीनों में सामने आए कई मामलों ने इस भरोसे को और मजबूत किया है।

CRPF में लंबे समय से शिकायतों और कल्याण से जुड़े मामलों की सुनवाई की व्यवस्था है। लेकिन पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया पर डीजी की सक्रियता ने इसे नई पहचान दी है। जवान सीधे अपनी बात रख रहे हैं। परिवार मदद मांग रहे हैं। और कई मामलों में खुद महानिदेशक जवाब देते दिखाई दे रहे हैं। साथ ही उनका जोर इस बात पर भी रहता है कि शिकायत का स्थायी समाधान आधिकारिक माध्यमों से ही होगा।

सबसे चर्चित मामलों में झारखंड के सरंडा जंगल में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान 6 जनवरी 2023 से लापता CRPF जवान बादल मुर्मू का मामला शामिल है।

मई 2026 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया। इसमें बादल मुर्मू की पत्नी झानो मुर्मू की परेशानी दिखाई गई थी। वीडियो तेजी से लोगों तक पहुंचा। मामला डीजी जी.पी. सिंह के संज्ञान में आया तो उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया दी और लिखा कि मामले का जल्द समाधान किया जाएगा।

अगले ही दिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से जानकारी दी कि परिवार को पारिवारिक पेंशन और एरियर मिल रहा है। जोखिम निधि, डीसीआरजी, अवकाश नगदीकरण और सामूहिक बीमा योजना की राशि भी जारी की जा चुकी है। अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

मामला यहीं नहीं रुका। बाद में डीजी स्वयं चाईबासा पहुंचे और झानो मुर्मू से मुलाकात की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों में बल पूरा सहयोग करेगा।

इस मामले ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी। लोगों ने कहा कि शीर्ष स्तर से इतनी जल्दी प्रतिक्रिया मिलना अपने आप में बड़ी बात है।

https://x.com/crpfindia/status/2060391311057010878

8 जून 2026 को CRPF जवान मनीष कुमार ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उनके परिवार पर जानलेवा हमला हुआ है। उनका कहना था कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं हो रही है।

पोस्ट पर डीजी जी.पी. सिंह ने जवाब दिया और मामले को संज्ञान में लिया। साथ ही उन्होंने मनीष कुमार से कहा कि पूरी जानकारी dg@crpf.gov.in पर भेजी जाए।

यह प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण थी। उन्होंने केवल सार्वजनिक जवाब नहीं दिया, बल्कि शिकायत को आधिकारिक प्रक्रिया से जोड़ दिया। इसके बाद जवान ने ईमेल के जरिए पूरा विवरण भेजा और मामले पर आगे कार्रवाई शुरू हुई।

इस घटना के बाद कई जवानों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें पहली बार महसूस हो रहा है कि उनकी बात शीर्ष स्तर तक पहुंच सकती है।

जून 2026 में एक और मामला सामने आया। एक CRPF जवान ने अपने लापता बेटे को खोजने में मदद की अपील की। पोस्ट में बताया गया कि परिवार लंबे समय से बेटे की तलाश कर रहा है। परिवार गहरे तनाव में है और लगातार कोशिशों के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है।

मामला सामने आने के बाद डीजी जी.पी. सिंह ने जवाब दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जनवरी से लगातार संपर्क बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है, लेकिन प्रयास जारी हैं।

इस जवाब से यह साफ हुआ कि मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट के बाद नहीं उठा था। इसकी निगरानी पहले से की जा रही थी और शीर्ष स्तर पर लगातार फॉलो-अप चल रहा था।

जी.पी. सिंह की सोशल मीडिया गतिविधियों का अध्ययन करने पर एक बात साफ दिखाई देती है। वे केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रहते। वे बार-बार जवानों को आधिकारिक मंचों का उपयोग करने की सलाह भी देते हैं।

उनका संदेश साफ है। सोशल मीडिया ध्यान आकर्षित कर सकता है, लेकिन समाधान के लिए शिकायत का रिकॉर्ड में आना जरूरी है। इसी कारण वे अक्सर शिकायतकर्ताओं को ईमेल के जरिए विस्तृत जानकारी भेजने के लिए कहते हैं।

यह तरीका दो स्तर पर काम करता है। पहला, शिकायत करने वाले को यह भरोसा मिलता है कि उसकी बात सुनी गई है। दूसरा, मामला औपचारिक व्यवस्था में दर्ज होकर आगे बढ़ता है।

CRPF देश की सबसे बड़ी अर्धसैनिक बलों में शामिल है। जवान दूर-दराज इलाकों में तैनात रहते हैं। उनके परिवार अक्सर गांवों और छोटे कस्बों में रहते हैं। ऐसे में कई बार छोटी समस्या भी बड़ा संकट बन जाती है।

हाल के महीनों में सामने आए मामलों ने यह संदेश दिया है कि जवानों और उनके परिवारों की बात केवल सोशल मीडिया पर नहीं सुनी जा रही, बल्कि उसे आधिकारिक व्यवस्था तक पहुंचाया जा रहा है। यही वजह है कि कई जवान अब खुले तौर पर कह रहे हैं कि उनकी आवाज शीर्ष स्तर तक पहुंच रही है और उस पर कार्रवाई भी हो रही है।

बादल मुर्मू का परिवार हो, मनीष कुमार का मामला हो या लापता बेटे की तलाश में जुटा परिवार—इन घटनाओं ने CRPF के भीतर शिकायत निवारण की उस व्यवस्था को सामने लाया है, जिसे डीजी जी.पी. सिंह सोशल मीडिया के जरिए और अधिक लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।