समय पर जांच और सस्ती दवाएं: कैंसर देखभाल पर NPPA का विशेष सत्र
कैंसर के इलाज को सस्ता और आसान बनाने के लिए राष्ट्रीय जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के तहत आने वाले राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने इस राष्ट्रीय जागरूकता सत्र का आयोजन किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में एनपीपीए के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुआ। […]
कैंसर के इलाज को सस्ता और आसान बनाने के लिए राष्ट्रीय जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के तहत आने वाले राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने इस राष्ट्रीय जागरूकता सत्र का आयोजन किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में एनपीपीए के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुआ। इसमें देश भर के डॉक्टर, प्रशासनिक अधिकारी और आम नागरिक शामिल हुए।
कार्यक्रम का मुख्य मकसद कैंसर की जरूरी दवाओं को सस्ता बनाना था। इसके साथ ही मरीजों तक इलाज की पहुंच आसान करना और बीमारी की समय पर पहचान के लिए लोगों को जागरूक करना था। कार्यक्रम में दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान (DSCI) की क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा शुक्ला मुख्य वक्ता थीं। उन्होंने बताया कि कैंसर से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। अगर बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल जाए, तो मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है।
“कैंसर जागरूकता की सही शुरुआत खुली बातचीत से होती है। समाज में आज भी कैंसर को लेकर एक डर का माहौल है। अगर हम शुरुआती चरण (First Stage) में ही बीमारी को पकड़ लें, तो मरीज का जीवन पूरी तरह बचाना संभव है। समय पर जांच और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।”
डॉ. प्रज्ञा शुक्ला, क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष, दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान
डॉ. शुक्ला ने महिलाओं को अपनी सेहत के प्रति सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि महिलाओं में स्तन (ब्रेस्ट) और सर्वाइकल कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए महिलाओं को समय-समय पर अपनी जांच जरूर करानी चाहिए। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सही उम्र में एचपीवी (HPV) वैक्सीन लगवाकर सर्वाइकल कैंसर से बचा जा सकता है।

कैंसर के इलाज में दवाओं का भारी खर्च मरीजों के लिए सबसे बड़ी रुकावट बनता है। कई बार पैसों की तंगी के कारण मरीज बीच में ही अपनी दवाइयां बंद कर देते हैं। इससे बीमारी और गंभीर रूप ले लेती है। एनपीपीए के अधिकारियों ने इस समस्या पर अपनी रणनीति सामने रखी।
सत्र में एनपीपीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा:
“हमारा प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में जीवनरक्षक कैंसर दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों और उनकी कीमतें आम आदमी की जेब के दायरे में रहें। जब दवाएं किफ़ायती होंगी, तो मरीज पैसों की तंगी के कारण बीच में इलाज छोड़ने को मजबूर नहीं होंगे।”
प्राधिकरण ने बताया कि कैंसर की जरूरी दवाओं की कीमतें तय की जा रही हैं। इससे मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम होगा। यह आयोजन हाइब्रिड मॉडल पर आधारित था, जिससे दिल्ली के बाहर रहने वाले लोग भी ऑनलाइन जुड़ सके।
इस पूरे कार्यक्रम के आयोजन और सफल संचालन में एनपीपीए के उप निदेशक तथा इंडियन इकोनॉमिक सर्विस (IES) के अधिकारी पल्लव कुमार चित्तेज और उनकी टीम की मुख्य भूमिका रही। ऑनलाइन माध्यम से डॉ. रोहित कुमार सहित कई अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया और लोगों के सवालों के जवाब दिए।
सत्र के समापन पर डॉ. प्रज्ञा शुक्ला को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और मार्गदर्शन के लिए स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस पूरे आयोजन का मुख्य संदेश यही था कि समय पर जांच कराएं, डॉक्टर की सलाह से पूरा इलाज लें और सस्ती दवाओं के जरिए कैंसर को मात दें।
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