कई बार रुका दिल, खराब मौसम की चुनौती, केदारनाथ में डॉक्टरों ने बचाई श्रद्धालु की जान
हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसे केदारनाथ धाम में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि समय पर इलाज और मजबूत इरादे से असंभव लगने वाली लड़ाई भी जीती जा सकती है। करीब 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में एक 58 वर्षीय श्रद्धालु का दिल कई बार धड़कना […]
हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसे केदारनाथ धाम में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि समय पर इलाज और मजबूत इरादे से असंभव लगने वाली लड़ाई भी जीती जा सकती है। करीब 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में एक 58 वर्षीय श्रद्धालु का दिल कई बार धड़कना बंद हुआ, लेकिन मेडिकल टीम ने लगातार प्रयास कर उनकी जान बचा ली। बाद में मरीज को बेहतर इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश भेजा गया, जहां उनका सफलतापूर्वक पेसमेकर प्रत्यारोपण किया गया।
समुद्र तल से करीब 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय, केदारनाथ में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने एक श्रद्धालु की जिंदगी बचाकर चिकित्सा सेवा का शानदार उदाहरण पेश किया है। चारधाम यात्रा पर आए 58 वर्षीय श्रद्धालु का दिल कई बार धड़कना बंद हो गया, लेकिन अस्पताल की मेडिकल टीम ने लगातार पुनर्जीवन (रेससिटेशन) प्रयासों, आपातकालीन कार्डियक पेसिंग और गहन निगरानी के जरिए उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया। बाद में मरीज को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया, जहां सफलतापूर्वक स्थायी पेसमेकर लगाया गया।
उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी श्रद्धालु केदारनाथ धाम की यात्रा पूरी करने के बाद सीने में भारीपन और बेचैनी की शिकायत लेकर स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय पहुंचे। करीब दो घंटे से उन्हें तकलीफ हो रही थी। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उनकी जांच शुरू की और पाया कि उनकी स्थिति बेहद गंभीर है।

प्रारंभिक जांच में मरीज की हृदय गति केवल 34 प्रति मिनट दर्ज की गई। रक्तचाप 180/100 मिमी एचजी था, ऑक्सीजन सैचुरेशन 90 प्रतिशत था और ब्लड शुगर का स्तर भी काफी अधिक मिला। मरीज पहले से टाइप-2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, डिस्लिपिडेमिया और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित थे।
ईसीजी में मरीज को कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक पाया गया। यह ऐसी गंभीर स्थिति है, जिसमें हृदय की विद्युत प्रणाली प्रभावित हो जाती है और दिल की धड़कन खतरनाक रूप से धीमी पड़ जाती है। जांच में मेटाबॉलिक एसिडोसिस और अनियंत्रित हाइपरग्लाइसीमिया भी सामने आया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय, केदारनाथ की मेडिकल टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। जीआईएमएस ग्रेटर नोएडा के सहायक प्रोफेसर डॉ. विनय कुमार के नेतृत्व में नर्सिंग अधिकारी नवीन, नरेंद्र, अक्षय और रवि ने मरीज को ट्रांसक्यूटेनियस कार्डियक पेसिंग, ऑक्सीजन थेरेपी, इंसुलिन थेरेपी, सतत कार्डियक मॉनिटरिंग और अन्य आवश्यक जीवनरक्षक उपचार प्रदान किए।
इलाज के दौरान मरीज को कई बार कार्डियक अरेस्ट हुआ और ईसीजी पर एसिस्टोली की स्थिति दर्ज हुई। हर बार मेडिकल टीम ने एडवांस्ड कार्डियक लाइफ सपोर्ट (ACLS) प्रोटोकॉल के तहत तत्काल सीपीआर और पुनर्जीवन प्रक्रिया शुरू की। कई प्रयासों के बाद मरीज में सफलतापूर्वक रिटर्न ऑफ स्पॉन्टेनियस सर्कुलेशन (ROSC) प्राप्त किया गया।
पूरी रात अस्पताल में गहन निगरानी और उपचार जारी रहा। मरीज को वासोप्रेसर सपोर्ट, एंटी-अरिदमिक दवाएं और नियमित आर्टेरियल ब्लड गैस मॉनिटरिंग के साथ आईसीयू स्तर की देखभाल दी गई। धीरे-धीरे उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने होश भी वापस पा लिया।
अगले दिन मरीज को एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश भेजने की योजना बनाई गई, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान संभव नहीं हो सकी। इसके बावजूद स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय की टीम ने लगातार निगरानी रखते हुए मरीज की स्थिति स्थिर बनाए रखी।
तीसरे दिन मरीज को केदारनाथ से फाटा तक एयरलिफ्ट किया गया। वहां से सड़क मार्ग से सरकारी मेडिकल कॉलेज श्रीनगर और बाद में एम्स ऋषिकेश पहुंचाया गया। एम्स में उनका सफलतापूर्वक स्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपण किया गया। चिकित्सकों के अनुसार अब उनकी हालत स्थिर है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।
यह घटना साबित करती है कि स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय, केदारनाथ जैसे दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में भी प्रशिक्षित चिकित्सा टीम, आधुनिक आपातकालीन सुविधाएं और त्वरित निर्णय क्षमता गंभीर मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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