बुजुर्गों के बेहतर कल के लिए: हेल्पऐज इंडिया का ‘इंस्टीट्यूट फॉर लोंगेविटी एंड एजिंग रिसर्च’

भारत इस समय अपनी आबादी के एक बहुत ही ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। देश में बुजुर्गों की संख्या दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है। इस सामाजिक बदलाव और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हेल्पऐज इंडिया ने एक बड़ा कदम उठाया है। हेल्पऐज इंडिया ने ‘इंसटीट्यूट फॉर लोंगेविटी एंड एजिंग रिसर्च’ […]

भारत इस समय अपनी आबादी के एक बहुत ही ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। देश में बुजुर्गों की संख्या दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ रही है। इस सामाजिक बदलाव और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हेल्पऐज इंडिया ने एक बड़ा कदम उठाया है। हेल्पऐज इंडिया ने ‘इंसटीट्यूट फॉर लोंगेविटी एंड एजिंग रिसर्च’ (ILAR) की शुरुआत की है। यह संस्थान भारत को बुजुर्गों की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने यानी ‘Age-ready India’ की दिशा में काम करेगा।

इस खास कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार पॉल की मौजूदगी में हुआ। डॉ. पॉल नीति आयोग (भारत सरकार) के पूर्व सदस्य (स्वास्थ्य) हैं। उन्होंने उस राष्ट्रीय समिति की अध्यक्षता भी की थी जिसने भारत में वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की थी। इस मौके पर देश के कई प्रमुख संस्थानों के दिग्गज विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

2050 का भारत और जरूरत

हमारा देश तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2050 तक भारत में लगभग हर 5 में से 1 व्यक्ति 60 साल या उससे अधिक उम्र का होगा। जब देश में बुजुर्गों की आबादी इतनी ज्यादा होगी, तो उनकी जरूरतें, सेहत और समस्याएं भी बदलेंगी।

इसी वजह से वैज्ञानिक रिसर्च, नई सोच और बेहतर नीतियों की जरूरत आज सबसे ज्यादा महसूस हो रही है। हेल्पऐज इंडिया ने अपने 48 सालों के लंबे अनुभव के आधार पर इस राष्ट्रीय संस्थान की नींव रखी है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य ज्ञान और उसके इस्तेमाल के बीच की दूरी को खत्म करना है। यह संस्थान शोधकर्ताओं, सरकार और जमीनी स्तर पर काम करने वाली संस्थाओं के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करेगा।

चार काम करेगा संस्थान

हेल्पऐज इंडिया का यह नया संस्थान केवल बंद कमरों में रिसर्च करने तक सीमित नहीं रहेगा। यह मुख्य रूप से चार बड़े काम एक साथ करेगा। पहला काम सटीक वैज्ञानिक रिसर्च करना है ताकि बुजुर्गों की असली समस्याओं को समझा जा सके। दूसरा काम नवाचार यानी नए समाधान खोजना है ताकि उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी आसान बने। तीसरा काम सरकार की नीतियों को सही दिशा देना है और चौथा काम इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की क्षमता बढ़ाना (Capacity Building) है।

इस संस्थान की सबसे बड़ी खासियत इसका नागरिक-केंद्रित (citizen-centred) दृष्टिकोण है। इसका मतलब यह है कि रिसर्च करते समय बुजुर्गों की अपनी आवाज़, उनके जीवन के अनुभव और उनकी इच्छाओं को ही सबसे ज्यादा अहमियत दी जाएगी।

अनुसंधान के 5 मुख्य क्षेत्र

संस्थान अपने पूरे रिसर्च वर्क को पांच आधुनिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बांटेगा। इसमें पहला क्षेत्र प्रिसिजन जेरियाट्रिक्स है, जिसके तहत बुजुर्गों की बीमारियों का सटीक और व्यक्तिगत इलाज खोजा जाएगा। दूसरा क्षेत्र सिल्वर इकॉनमी है, जो बुजुर्गों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और बाजार में उनके अनुकूल अवसर तैयार करने पर ध्यान देगा।

तीसरा क्षेत्र लीगल जेरोंटोलॉजी है, जिसके जरिए बुजुर्गों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी और उन्हें न्याय दिलाया जाएगा। चौथा क्षेत्र जेरॉन टेक है, जिसमें नई तकनीकों और गैजेट्स की मदद से बुजुर्गों की जिंदगी को आसान बनाया जाएगा। पांचवां क्षेत्र एजिंग फ्यूचर्स है, जो भविष्य में उम्र बढ़ने के रुझानों और आने वाली चुनौतियों का समय रहते आकलन करेगा।

नई योजनाएं और बड़े प्रोजेक्ट्स

यह संस्थान बुजुर्गों के जीवन में सुधार लाने के लिए कई व्यावहारिक और बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू करने जा रहा है। यह हर साल ‘स्टेट ऑफ एजिंग इन इंडिया’ नाम से एक मुख्य वार्षिक रिपोर्ट जारी करेगा, जिससे देश में बुजुर्गों की वास्तविक स्थिति की साफ तस्वीर मिलेगी।

इसके अलावा, बुजुर्गों की सहूलियत के लिए एक सिल्वर टेक इनोवेशन लैब बनाई जाएगी। बुजुर्गों के स्वास्थ्य और स्वास्थ्य प्रणालियों पर लगातार नज़र रखने के लिए एक विशेष ऑब्जर्वेटरी स्थापित होगी। युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ने के लिए इनोवेशन फेलोशिप प्रोग्राम, लॉन्गेविटी रिसर्च लीडरशिप प्रोग्राम और एक ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म की शुरुआत भी होगी। जमीनी सच्चाई को करीब से समझने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में कई पायलट अध्ययन भी किए जाएंगे।

डॉ. विनोद कुमार पॉल के 5 ‘मंत्र’

संस्थान को इस क्षेत्र की पहली और अनोखी पहल बताते हुए मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार पॉल ने कहा कि बुजुर्गों के मुद्दे में सामाजिक, आर्थिक और लैंगिक (Gender) पहलू बेहद महत्वपूर्ण हैं। डॉ. पॉल ने इस संस्थान के सफल संचालन के लिए पांच मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत यानी ‘मंत्र’ साझा किए।

  • संस्थान के 5 मुख्य मंत्र:
    1. स्थायी भारतीय मॉडल: एक ऐसा ढांचा जो हमारी अपनी संस्कृति और परंपराओं में रचा-बसा हो।
    2. समावेशी और न्यायसंगत: समाज के हर वर्ग के बुजुर्ग को बराबरी का हक और सम्मान देने वाला मॉडल।
    3. लैंगिक संवेदनशीलता: बुजुर्ग महिलाओं की स्थिति और उनकी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना।
    4. सहयोगात्मक दृष्टिकोण: सभी शैक्षणिक संस्थानों, संगठनों और हितधारकों को एक साथ लाना।
    5. मुख्य केंद्र (Nucleus): इस संस्थान को देश भर के प्रयासों का मुख्य केंद्र बनना होगा।

“जिंदगी जोड़ना ही असली मकसद”

कार्यक्रम के दौरान इंसटीट्यूट फॉर लोंगेविटी एंड एजिंग रिसर्च (ILAR) के निदेशक प्रोफेसर अनिल कृष्णन ने संस्थान के मुख्य विजन को बहुत ही आसान और प्रेरक शब्दों में रखा।

प्रोफेसर अनिल कृष्णन ने कहा:

“हमारा मानना है कि लंबी उम्र का मतलब सिर्फ जिंदगी में साल जोड़ना नहीं है, बल्कि उन सालों में जिंदगी जोड़ना है। हमारा मिशन बेहतरीन रिसर्च करना, मजबूत साझेदारियां बनाना और वैज्ञानिक खोजों को ऐसे आसान समाधानों में बदलना है, जिससे हमारे बुजुर्ग एक सक्रिय, स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन जी सकें।”

उन्होंने आगे कहा कि हेल्पऐज इंडिया के दशकों के कम्युनिटी अनुभव को इस रिसर्च से जोड़ा जाएगा ताकि ऐसी नीतियां बनें जो समाज में बड़ा और सार्थक बदलाव ला सकें।

भारत के पास एक अनोखा मौका

कार्यक्रम में हेल्पऐज इंडिया के सीईओ रोहित प्रसाद ने कहा कि हेल्पऐज इंडिया ने दशकों से बुजुर्गों की देखभाल और उनके अधिकारों के लिए काम किया है। बदलती आबादी के साथ भारत के पास अपनी लंबी उम्र (Longevity) की कहानी खुद लिखने का एक अनोखा मौका है।

रोहित प्रसाद ने इस सपने को सच करने के लिए तीन मुख्य सुझाव दिए। पहला, 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के जीवन को समझने के लिए सटीक और विस्तृत आंकड़े (datasets) तैयार किए जाएं। दूसरा, देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में ‘एजिंग एंड लोंगेविटी रिसर्च हब’ स्थापित किए जाएं। तीसरा, दानदाता संस्थाओं, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और फंडिंग एजेंसियों द्वारा रिसर्च और नवाचार में ज्यादा निवेश किया जाए। रोहित प्रसाद ने कहा कि ILAR के जरिए हम यह सुनिश्चित करेंगे कि लंबी जिंदगी न सिर्फ लंबी हो, बल्कि ज्यादा सेहतमंद, सुरक्षित, गरिमापूर्ण और अर्थपूर्ण भी हो।

48 सालों की शानदार यात्रा

हेल्पऐज इंडिया पिछले 48 सालों से देश के जरूरतमंद और वंचित बुजुर्गों की सेवा में लगातार काम कर रहा है। यह संस्था स्वास्थ्य सेवा, बुजुर्गों की देखभाल, आजीविका के साधन, आपदा राहत, अनुसंधान और अधिकारों की वकालत के क्षेत्र में सक्रिय है।

हेल्पऐज इंडिया भारत का पहला और इकलौता ऐसा संगठन है जिसे साल 2020 में बुजुर्गों और जनसंख्या के मुद्दों पर उत्कृष्ट काम के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या पुरस्कार’ (UN Population Award) से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए किए गए बेहतरीन काम के लिए भारत सरकार ने इसे ‘वयोश्रेष्ठ सम्मान’ से भी नवाजा है।

संक्षेप में कहें तो, ‘इंसटीट्यूट फॉर लोंगेविटी एंड एजिंग रिसर्च’ की शुरुआत भारत के करोड़ों बुजुर्गों के सम्मानजनक, सुरक्षित और खुशहाल भविष्य की दिशा में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी कदम है।