एम्स समिट : मोटापे का नया खतरा. कम वजन वाले भी पेट की चर्बी को नजरअंदाज ना करें
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में देश का पहला दो दिवसीय ‘फर्स्ट एम्स ओबेसिटी समिट – 2026’ आयोजित हुआ। एम्स के जवाहरलाल नेहरू सभागार में इसका उद्घाटन एम्स के निदेशक डॉ. निखिल टंडन ने किया। समित का मुख्य विषय ‘डिकोडिंग ओबेसिटी: बायोलॉजी टू रेमेडी’ (मोटापे को समझना: जीव विज्ञान से उपचार तक) रखा गया […]
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में देश का पहला दो दिवसीय ‘फर्स्ट एम्स ओबेसिटी समिट – 2026’ आयोजित हुआ। एम्स के जवाहरलाल नेहरू सभागार में इसका उद्घाटन एम्स के निदेशक डॉ. निखिल टंडन ने किया। समित का मुख्य विषय ‘डिकोडिंग ओबेसिटी: बायोलॉजी टू रेमेडी’ (मोटापे को समझना: जीव विज्ञान से उपचार तक) रखा गया है। एम्स के चिकित्सा (मेडिसिन) विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में देश भर के बड़े डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने देश में तेजी से पैर पसार रहे मोटापे पर गंभीर चिंता जताई है।

दिखावा नहीं, गंभीर बीमारी
एम्स के निदेशक डॉ. निखिल टंडन ने कहा कि मोटापा केवल दिखने या रूप-रंग से जुड़ी समस्या नहीं है। यह असल में एक बहुत गंभीर बीमारी है जो हमारे शरीर को अंदर से खोखला करती है। वजन बढ़ने से शरीर में कई और जानलेवा बीमारियां दस्तक देने लगती हैं। इनमें टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां सबसे प्रमुख हैं।
डॉ. टंडन ने यह भी साफ किया कि पहले के मुकाबले देश में मोटापे के शिकार लोगों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। इसी वजह से देश में दूसरी गंभीर बीमारियां भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री खुद तंदुरुस्ती और स्वास्थ्य पर खुलकर बात करते हैं, तो पूरे देश में एक अच्छा संदेश जाता है। डॉक्टर समुदाय इस बात के लिए उनका आभारी है कि देश के शीर्ष स्तर से स्वास्थ्य को लेकर इतनी जागरूकता फैलाई जा रही है।
रोकथाम ही असली इलाज
इस सम्मेलन में डॉक्टरों ने एक बहुत पते की बात कही। उन्होंने कहा कि मोटापा बढ़ने के बाद उसे कम करना बहुत टेढ़ी खीर है। कम किए गए वजन को लंबे समय तक बनाए रखना उससे भी बड़ी चुनौती होती है। इसलिए सबसे सही और आसान तरीका यह है कि हम वजन को बढ़ने ही न दें।
इसके लिए हमें बचपन से ही बच्चों की आदतों पर ध्यान देना होगा। मोटापा केवल शरीर के काम करने के तरीके से नहीं बढ़ता। यह हमारे रहन-सहन, खान-पान, आसपास के माहौल और संस्कृति से भी तय होता है। जब कोई व्यक्ति बड़ा हो जाता है, तो उसकी आदतें बदलना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए रोकथाम की शुरुआत बचपन से ही होनी चाहिए।
डॉ. निखिल टंडन, निदेशक, एम्स दिल्ली
“मोटापा केवल एक कॉस्मेटिक चिंता (दिखावे की समस्या) नहीं है; यह कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हुआ है। तुलनात्मक रूप से, देश में पहले के मुकाबले मोटापे का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और इसके कारण कई अन्य गंभीर बीमारियां पैदा हो रही हैं।”
बदलना होगा पूरा नजरिया
डॉ. निखिल टंडन ने पोषण को लेकर भी एक नया नजरिया सामने रखा। उन्होंने कहा कि हमें पोषण को किसी एक चश्मे से नहीं देखना चाहिए। चाहे कोई व्यक्ति वजन घटाने की कोशिश कर रहा हो या कोई कुपोषण की वजह से वजन बढ़ाने की कोशिश कर रहा हो, दोनों ही स्थितियों में शरीर को सही और संतुलित पोषण मिलना जरूरी है। समाज में हर स्तर पर इस संतुलित पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ानी होगी।
कम वजन भी खतरनाक
सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष और एम्स के चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. नवल विक्रम ने एक बहुत ही चौंकाने वाली जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दक्षिण एशियाई आबादी, खासकर हम भारतीयों का शरीर मोटापे के असर के मामले में पश्चिमी देशों से अलग है। हमारे यहां कम बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) होने के बावजूद भी मधुमेह और मेटाबॉलिक बीमारियां होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है।

डॉ. नवल विक्रम ने सावधान करते हुए कहा कि अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर वे बाहर से बहुत मोटे नहीं दिख रहे हैं, तो वे सुरक्षित हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। अगर किसी के पेट के आसपास चर्बी जमा है, तो वह बीमारियों के सीधे निशाने पर है। शरीर का कुल वजन सामान्य होने के बाद भी पेट की यह चर्बी सेहत के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है। मोटापा अब किसी एक उम्र, अमीर-गरीब या किसी खास वर्ग तक सीमित नहीं है। यह बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबको अपनी चपेट में ले रहा है। दिल्ली जैसे बड़े शहरों में तो आधी से ज्यादा आबादी मोटापे से परेशान है।
डॉ. नवल विक्रम, प्रोफेसर, मेडिसिन, एम्स दिल्ली
“तनाव और कम नींद शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगाड़ती है, जिससे मोटापा बढ़ता है। इसके अलावा पैक्ड फूड, ज्यादा नमक, चीनी और तेल का इस्तेमाल मोटापे की बड़ी वजह है। देश में हर तीसरा व्यक्ति मोटापे से परेशान है। बीएमआई कम होने के बाद भी अगर पेट के आसपास चर्बी ज्यादा है, तो यह सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। यह सोचना गलत है कि बाहर से सामान्य दिखने वाला व्यक्ति बीमार नहीं हो सकता।”
स्क्रीन टाइम और जंक फूड
डॉक्टरों ने बताया कि आजकल लोग देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप या टीवी की स्क्रीन पर व्यस्त रहते हैं। इस खराब आदत की वजह से नींद पूरी नहीं होती। नींद की कमी से शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जो मोटापा बढ़ाता है। इसके अलावा डिब्बाबंद खाना, जंक फूड, ज्यादा नमक, चीनी और तेल का इस्तेमाल इस आग में घी का काम कर रहा है।
सम्मेलन में डॉक्टरों ने स्वस्थ रहने के लिए कुछ बेहद जरूरी सुझाव दिए:
- रोज़ाना कम से कम 30 से 45 मिनट तक टहलें या व्यायाम जरूर करें।
- भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल और फाइबर वाली चीजें शामिल करें।
- कम से कम 6 से 7 घंटे की गहरी और भरपूर नींद लें।
जरूरी चेतावनी: वजन घटाने का दावा करने वाली बाजारू दवाओं या सप्लीमेंट्स से दूर रहें। ऐसी दवाओं का इस्तेमाल बिना किसी हार्मोन विशेषज्ञ (एंडोक्रिनोलॉजिस्ट) या चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल न करें। ये दवाएं आपके शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
- एम्स दिल्ली
- बदलता इंडिया
- सेहत सलाह