संडे को भी नहीं रुकेगा इलाज, अपोलो ने शुरू की नई सेवा ‘ऑलवेज ओपन, ऑलवेज हियर’

कामकाजी लोगों को मिलेगी बड़ी राहत: अब बिना छुट्टी लिए रविवार को भी मिल सकेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर, हो सकेंगे लैब टेस्ट और ओपीडी जांचें हफ्ते के छह दिन सुबह से शाम तक दफ्तर की भागदौड़, फिर परिवार की जिम्मेदारियां—इस आपाधापी में अमूमन जो चीज सबसे पहले पीछे छूटती है, वह है सेहत। सिरदर्द या रूटीन […]

कामकाजी लोगों को मिलेगी बड़ी राहत: अब बिना छुट्टी लिए रविवार को भी मिल सकेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर, हो सकेंगे लैब टेस्ट और ओपीडी जांचें

हफ्ते के छह दिन सुबह से शाम तक दफ्तर की भागदौड़, फिर परिवार की जिम्मेदारियां—इस आपाधापी में अमूमन जो चीज सबसे पहले पीछे छूटती है, वह है सेहत। सिरदर्द या रूटीन बीपी-शुगर की जांच को लोग यह सोचकर टालते रहते हैं कि ‘संडे को डॉक्टर कहां मिलेंगे’। इसी सोच और वक्त की कमी को दूर करने के लिए अपोलो हॉस्पिटल्स ने एक बड़ी सेवा शुरू की है। अस्पताल ने ‘ऑलवेज ओपन, ऑलवेज हियर’ पहल के तहत अब रविवार के दिन भी सामान्य ओपीडी, विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श, पैथोलॉजी-रेडियोलॉजी जांचें और हेल्थ चेकअप की सुविधा देने का फैसला किया है।

अब तक अस्पतालों में रविवार के दिन केवल आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं ही चालू रहती थीं। लेकिन इस नई व्यवस्था के लागू होने से मरीज हफ्ते के सातों दिन अपनी सुविधा के अनुसार अस्पताल जाकर डॉक्टरों की सलाह ले सकेंगे और अपनी पेंडिंग जांचें पूरी करवा सकेंगे।

बिना लक्षण वाली बीमारियों का खतरा

इस फैसले के पीछे सिर्फ सुविधा ही नहीं, बल्कि देश में तेजी से बढ़ती बीमारियों के चौंकाने वाले आंकड़े भी हैं। अपोलो की ‘हेल्थ ऑफ द नेशन 2026’ रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत में मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां अब युवाओं और कामकाजी आबादी को तेजी से अपनी चपेट में ले रही हैं।

अस्पताल के नेटवर्क में जांच कराने आए करीब 25 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला कि लगभग 26% लोग हाई ब्लड प्रेशर और 23% लोग डायबिटीज से पीड़ित थे।

चौंकाने वाली बात यह है कि इन मरीजों में बीमारी का कोई भी बाहरी लक्षण नहीं दिख रहा था। यानी लाखों लोग बिना जाने एक शांत महामारी के साथ जी रहे हैं। डॉक्टरों का मानना है कि समय पर रूटीन जांच न होना इसका सबसे बड़ा कारण है। संडे को ओपीडी खुलने से लोग समय रहते अपनी जांच करा सकेंगे।

अस्पताल प्रबंधन का क्या कहना है?

अस्पताल का काम केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि बीमारी को होने से रोकना भी है। उन्होंने बताया कि अस्पताल आपातकालीन स्थिति के लिए हमेशा खुला रहता था, लेकिन अब रूटीन केयर को भी सातों दिन उपलब्ध कराकर मरीजों को सही समय पर सही देखभाल देने की कोशिश की जा रही है।

डॉ. प्रताप सी. रेड्डी, चेयरमैन, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप

कामकाज और परिवार के बीच संतुलन बनाने वाले लोगों के लिए रविवार का दिन काफी व्यावहारिक होता है। इस कदम से किसी को भी अपनी नियमित डॉक्टरी सलाह या फॉलो-अप के लिए दफ्तर से छुट्टी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

डॉ. प्रीथा रेड्डी, एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरपर्सन, अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप

पहले भी हेल्थ फील्ड में कराए बदलाव

1983 में अपनी स्थापना के बाद से इस समूह ने देश में पहली बार हुई जटिल दिल की सर्जरी से लेकर दक्षिण एशिया का पहला प्रोटॉन कैंसर सेंटर शुरू करने जैसे कई काम किए हैं। 3 करोड़ से अधिक लोगों की जांच करने वाला ‘मास्टर हेल्थ चेक’ और एआई (AI) पर आधारित जोखिम बताने वाला ‘अपोलो प्रोहेल्थ’ सिस्टम भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं।

आम मरीज पर क्या होगा इसका असर?

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा नौकरीपेशा लोगों, घर के बुजुर्गों और उन परिवारों को होगा जो कार्यदिवसों (Weekdays) में अस्पताल नहीं पहुंच पाते। मरीजों को अब अपनी जांच या डॉक्टर से फॉलो-अप परामर्श के लिए सोमवार आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह सेवा उनके मौजूदा डॉक्टर, तकनीशियन और बुनियादी ढांचे के जरिए ही संचालित की जाएगी।