जांच नहीं, बीमारियों को रोकना है असली लक्ष्य: नीति आयोग के उपाध्यक्ष का बड़ा बयान 

“भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं का मकसद केवल बीमारियों की जांच या उनका पता लगाना नहीं होना चाहिए। स्क्रीनिंग अपनी जगह जरूरी है, लेकिन हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य बीमारियों से बचाव होना चाहिए—यानी ऐसे कदम उठाना जिससे बीमारी पैदा ही न हो।” यह महत्वपूर्ण बात नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिरी ने नई दिल्ली में कही। […]

“भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं का मकसद केवल बीमारियों की जांच या उनका पता लगाना नहीं होना चाहिए। स्क्रीनिंग अपनी जगह जरूरी है, लेकिन हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य बीमारियों से बचाव होना चाहिए—यानी ऐसे कदम उठाना जिससे बीमारी पैदा ही न हो।” यह महत्वपूर्ण बात नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिरी ने नई दिल्ली में कही। नीति आयोग के उपाध्यक्ष शनिवार, 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान, आईएलबीएस में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  

शिक्षक दिवस के अवसर पर संस्थान के एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में “विकसित भारत@2047 के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की नई सोच” विषय पर एक विशेष व्याख्यान (ओरेशन) रखा गया था, जहाँ उन्होंने मुख्य वक्ता के रूप में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का पूरा खाका खींचा। 

अशोक लाहिरी ने अपने संबोधन में कहा कि साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए देश के नागरिकों का स्वस्थ और कार्यकुशल होना सबसे पहली शर्त है। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र की कई बड़ी चुनौतियों और भावी रणनीतियों को रेखांकित किया: 

  • सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा: देश में एक ऐसा हेल्थ सिस्टम खड़ा करना होगा जो हर नागरिक की पहुंच में हो, किफायती हो और बीमारियों के बदलते स्वरूप के अनुसार तुरंत काम करने में सक्षम हो। 
  • नीतियों में बदलाव: जो भी स्वास्थ्य अभियान जमीनी स्तर पर सफल साबित हो रहे हैं, उन्हें स्थायी सरकारी नीतियों में बदला जाना चाहिए ताकि बड़े पैमाने पर समाज को इसका फायदा मिले। 
  • मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी: उन्होंने देश में चिकित्सा शिक्षा की क्षमता में हुए बड़े विस्तार का जिक्र किया, जिसके तहत मेडिकल कॉलेजों की सीटें और पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) सीटों में भारी बढ़ोतरी की गई है। 
  • सरकारी योजनाओं का सहारा: देश के दूर-दराज हिस्सों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में उन्होंने आयुष्मान भारत योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। 

आईएलबीएस के निदेशक प्रोफेसर एस.के. सरिन ने संस्थान के सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति संकल्प को सामने रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को एक नया आयाम देने की बात कही। प्रोफेसर सरिन ने जोर देते हुए कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं को सिर्फ अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित रखना काफी नहीं है, बल्कि इन्हें सीधे आम समाज और समुदाय के बीच ले जाना बेहद जरूरी है।” 

उन्होंने बताया कि आईएलबीएस इस दिशा में कई सक्रिय कदम उठा रहा है, जिसमें स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर केंद्रित कार्यक्रम, ‘स्माइल्स’ (SMILES) पहल और मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चलाए जा रहे आउटरीच कार्यक्रम शामिल हैं। इनका मकसद बीमारी के गंभीर होने से पहले ही शुरुआती स्तर पर हस्तक्षेप करना है। 

शिक्षक दिवस व्याख्यान में मुख्य वक्ताओं के अलावा चिकित्सा जगत और संस्थान की कई अन्य महत्वपूर्ण हस्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंच पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष और संस्थान के निदेशक के साथ आईएलबीएस के डीन डॉ. मृदुल कुमार डागा भी प्रमुखता से उपस्थित रहे, जिन्होंने कार्यक्रम के समन्वय में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही संस्थान के वरिष्ठ फैकल्टी मेंबर्स, चिकित्सा विशेषज्ञ, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में मेडिकल के छात्र-छात्राएं इस सत्र का हिस्सा बने। 

एक विकसित भारत का निर्माण केवल अस्पतालों की इमारतें या बिस्तरों की संख्या बढ़ाने से नहीं होगा, बल्कि इसके लिए स्वास्थ्य नीतियों में एक बड़ा बदलाव लाना होगा। देश को अब केवल इलाज आधारित (क्युरेटिव) व्यवस्था से हटकर बचाव आधारित (प्रिवेंटिव) स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर बढ़ना होगा, जहाँ सही पोषण, जीवनशैली में सुधार और नई तकनीकी खोजों (इनोवेशन) के जरिए बीमारियों को पनपने से पहले ही रोका जा सके।