मणिपाल हॉस्पिटल गुरुग्राम में हरियाणा का पहला रोबोट-असिस्टेड सेरेमिक नी रिप्लेसमेंट

मणिपाल हॉस्पिटल गुरुग्राम में हरियाणा का पहला रोबोट-असिस्टेड सेरेमिक टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया। इसे जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह सर्जरी 54 साल की एक महिला की गई। महिला एडवांस्ड ऑस्टियोआर्थराइटिस और मोटापे से परेशान थीं। इसके अलावा गिरने के कारण उनके एंटीरियर क्रूशिएट लिगामेंट (ACL) और […]

मणिपाल हॉस्पिटल गुरुग्राम में हरियाणा का पहला रोबोट-असिस्टेड सेरेमिक टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया। इसे जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह सर्जरी 54 साल की एक महिला की गई। महिला एडवांस्ड ऑस्टियोआर्थराइटिस और मोटापे से परेशान थीं। इसके अलावा गिरने के कारण उनके एंटीरियर क्रूशिएट लिगामेंट (ACL) और मेनिस्कस में पुरानी चोट भी थी।

डॉक्टरों के मुताबिक, चोट के बाद घुटने की प्राकृतिक बनावट बिगड़ गई थी। इससे कार्टिलेज तेजी से घिसने लगा और महिला को एडवांस्ड आर्थराइटिस हो गया। मोटापे के कारण घुटने पर दबाव और बढ़ गया। हालत यह थी कि चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया था। मरीज की जांच के बाद मणिपाल हॉस्पिटल गुरुग्राम में रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं ऑर्थोपेडिक सर्जरी के कंसल्टेंट डॉ. संजय कपूर ने रोबोट-असिस्टेड सर्जरी के जरिए नेक्स्ट जनरेशन सेरेमिक नी इम्प्लांट लगाने की सलाह दी।

डॉ. संजय कपूर ने बताया कि रोबोटिक तकनीक की मदद से इम्प्लांट को बेहद सटीक तरीके से लगाया गया। इससे सॉफ्ट टिश्यू का संतुलन भी बेहतर बना। वहीं सेरेमिक इम्प्लांट ने मजबूत और टिकाऊ विकल्प दिया।

अस्पताल के अनुसार, रोबोटिक सेरेमिक टोटल नी रिप्लेसमेंट में आधुनिक सेरेमिक इम्प्लांट तकनीक और सबमिलीमीटर स्तर की रोबोटिक सटीकता का इस्तेमाल होता है। इससे इम्प्लांट की बेहतर एलाइनमेंट, कम सूजन और जल्दी रिकवरी जैसे फायदे मिलते हैं। मरीज को ज्यादा आराम भी मिलता है। साथ ही मेटल आयन निकलने की चिंता नहीं रहती। सेरेमिक इम्प्लांट घिसाव के प्रति अधिक प्रतिरोधी होता है और तीन दशक से ज्यादा समय तक चल सकता है।

सर्जरी के बाद मरीज की हालत में अच्छा सुधार हुआ है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि वह जल्द ही सामान्य दिनचर्या में लौट सकेंगी और पहले से ज्यादा आत्मविश्वास के साथ चल-फिर सकेंगी।