खून की बीमारियों वाले बच्चों के इलाज को बेहतर बनाने यूपी के कई मेडिकल कॉलेज जुड़े

खून की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की जांच, इलाज और समय पर रेफरल को बेहतर बनाने के लिए नोएडा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ ने नेशनल हेल्थ मिशन के साथ मिलकर PGICH Hemo-GRAM 2026 का आयोजन किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 40 से ज्यादा […]

खून की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की जांच, इलाज और समय पर रेफरल को बेहतर बनाने के लिए नोएडा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ ने नेशनल हेल्थ मिशन के साथ मिलकर PGICH Hemo-GRAM 2026 का आयोजन किया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 40 से ज्यादा मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। इनमें बाल रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, हेमेटोलॉजिस्ट, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ, रिहैबिलिटेशन एक्सपर्ट और स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़े अधिकारी शामिल थे। बैठक में हीमोफिलिया, थैलेसीमिया और दुर्लभ ब्लीडिंग डिसऑर्डर से पीड़ित बच्चों के इलाज को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने रेफरल सिस्टम, इलाज के मानक, निगरानी व्यवस्था और डेटा मैनेजमेंट को मजबूत करने पर जोर दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, PGICH Hemo-GRAM 2026 राज्य में बच्चों के रक्त रोगों और कैंसर के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे डॉक्टरों, प्रयोगशालाओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और मरीज सहायता सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा मिलेगा।

वैज्ञानिक सत्रों में हीमोफिलिया, वॉन विलेब्रांड बीमारी और अन्य दुर्लभ ब्लीडिंग डिसऑर्डर की जांच और इलाज पर चर्चा हुई। इसके अलावा थैलेसीमिया की जांच, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, कैरियर की पहचान, प्रीनेटल डायग्नोसिस और डेटा मैनेजमेंट जैसे विषय भी शामिल रहे। प्रतिभागियों को फैक्टर इन्फ्यूजन, फिजियोथेरेपी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन तकनीक और कीलेशन थेरेपी का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

उद्घाटन सत्र में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की मानद महासचिव डॉ. रुचिरा माहेश्वरी गुप्ता, PGICH के डीन एवं पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. डी.के. सिंह और देश के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान हीमोफिलिया और थैलेसीमिया के रेफरल और इलाज से जुड़े विशेष पोस्टर भी जारी किए गए। इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन तथा विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है। इनका उद्देश्य डॉक्टरों को बीमारी की जल्द पहचान, सही समय पर रेफरल और बेहतर इलाज में मदद करना है। हर भाग लेने वाले मेडिकल कॉलेज को इन पोस्टरों का सेट दिया गया। साथ ही इन्हें प्रदेश की अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं तक पहुंचाने के लिए डिजिटल संस्करण भी उपलब्ध कराए जाएंगे।