दुर्गम राहों से दिव्य दर्शन तक: बाबा केदारनाथ धाम की अविस्मरणीय यात्रा

केदारनाथ धाम की कठिन किन्तु आध्यात्मिक यात्रा केवल एक तीर्थ-दर्शन नहीं, बल्कि आस्था, साहस और आत्मानुभूति का अद्भुत संगम है। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के बेहोशी विभाग में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. भुवन चंद्र पाण्डेय अपने इस संस्मरण में बाबा केदारनाथ की दिव्यता, यात्रा के रोमांच और मानव सेवा के प्रेरक अनुभवों को शब्द देते […]

हम सब अपने बचपन से ही सुनते आ रहे हैं कि केदारनाथ घाटी की यात्रा बहुत दुर्गम है, पर जो भी दर्शन कर चुके हैं, सबने एक स्वर में बताया है कि यह अत्यंत ही दिव्य, रमणीक, सुंदर व पवित्र स्थल है। चारों तरफ आकाश की ऊँचाई छूते बर्फ से ढके पहाड़ हैं। सहस्राब्दियों से ही वहाँ पहुँचना बहुत कठिन कार्य है। दुर्गम-दुष्कर मार्ग के साथ-साथ ऋतुओं का अत्यंत गहरा प्रभाव रहता है, लेकिन बाबा के भक्तों को इन सबसे कोई सरोकार नहीं। ऋतुएँ अपना कार्य करती हैं और भक्त अपना। जब भोलेनाथ की अलख जगी हो तो ये सब कठिनाइयाँ बेमानी लगती हैं।

हर भारतीय के अंतर्मन में इच्छा होती है कि इस जीवनकाल में कम से कम एक बार तो चारों धाम हो ही आएँ। मैं जाने कितने दशकों से जनमानस की इस तीव्र इच्छा देख-सुन रहा हूँ, पर इस पावन तीर्थ की महत्ता मेरी मूढ़ बुद्धि में भी अब कुछ-कुछ समझ में आने लगी है। अभी केवल एक पक्ष पहले तक इस यात्रा की कोई भी योजना नहीं थी। जब मन में विचार उबाल लेने लगे तो सबसे पहले छुट्टी को लेकर कसमकश हुई, फिर अगला पग था पत्नी की हाँ या ना। कुछ समय तक धर्मपत्नी की मीठी-सी ना-नुकुर के बाद सहमति मिल गई। सारा कार्यक्रम बनने और सारी व्यवस्था होने के बाद भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं बाबा केदारनाथ के पुण्य धाम जा रहा हूँ।

दिल्ली से कार द्वारा फाटा जाने का कार्यक्रम तय हुआ। दिल्ली से हमारे एक प्रिय वरिष्ठ, जिनमें अद्भुत सामर्थ्य, धैर्य व चालन क्षमता है, उन्होंने रात्रि तक ही गाड़ी को फाटा पहुँचा दिया। मैं उनकी दक्षता पर दंग था। यहाँ की पूरी व्यवस्था लगभग त्रुटिहीन थी— पहुँचना, रहना, भोजन, चिकित्सालय के कार्यक्रम व बाबा के दर्शन; एक अलौकिक अनुभूति।

अगले दिन फाटा से हेलीकॉप्टर उड़ने में कुछ विलंब हुआ। कभी मौसम की अठखेलियाँ, कभी कुछ और छुटपुट परेशानियाँ। ऐसा लगा जैसे स्वयं बाबा केदारनाथ हम लोगों के मन की थाह ले रहे हों— “साहस है तभी आओ, वरना बाद में आना।” जब ऐसा लगने लगा कि अब हेलीकॉप्टर चलेगा कि नहीं, तो अभी-अभी बने कुछ नए मित्रों के साथ मिलकर मार्ग के अवरोध को दूर करने के लिए एक मंत्र का जाप भी किया।

कुछ देर में एक हेलीकॉप्टर फटर-फटर की धौंकनी-सी आवाज के साथ हरे-भरे जंगलों के बीच में प्रकट हो गया और धीरे से जमीन पर आ खड़ा हुआ। कुछ जरूरी निर्देश दिए गए और फिर हम घने जंगल से ढकी पर्वतमाला में सैकड़ों मीटर की ऊँचाई पर विचरण कर रहे थे।

कठिन रास्तों में पूरे भारतवर्ष से व विदेशों से आए भक्तों की लंबी कतारें— कोई पैदल तो कोई पालकी पर, कुछ डोली में तो कुछ खच्चर पर यात्रा कर रहे थे। पतले सफेद धागे जैसी नदी की धारा, नन्हे-नन्हे से दिखते इंसान, ऊँचे-ऊँचे वृक्ष खिलौनों जैसे दिखाई दे रहे थे। पूरी घाटी जैसे फूलगोभी की तरह खिली हुई प्रतीत हो रही थी।

कुछ ही देर में उतुंग हिमशिखरों से घिरे हुए स्थान केदारनाथ धाम के निकट उतर गए। सभी के चेहरे प्रातःकाल की अरुणिमा के सदृश खिले हुए थे। थकान कोसों दूर थी। कुछ लोगों ने “बाबा केदारनाथ की जय” का उद्घोष किया और चल पड़े मंदिर प्रांगण की ओर।

मंदिर प्रांगण में भारी भीड़ थी, पर उत्साह ऐसा था कि कतार में घंटों लगने पर भी उत्साह में कोई कमी नहीं थी। बीच-बीच में कुछ लोग जयघोष की हुंकार भर रहे थे, जिससे ऊर्जा व उत्साह दोगुना बना हुआ था। यह एक सुंदर स्थान है। अब बाबा का निवास तो अलौकिक होना ही था। यह वह दिव्य स्थान है जहाँ ध्याता, ध्यान और ध्येय सब एकाकार हो जाते हैं।

यहाँ एक अनूठा अनुभव और हुआ। यहाँ बहुत से लोग विभिन्न प्रांतों व दूर-दराज के क्षेत्रों से आए थे, जो पहले तो अपरिचित थे, पर कुछ देर की मुलाकात के बाद ही ऐसा लगने लगा कि जन्मों से ही पुराना नाता हो। ऐसी भेंट में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगा था उनके मन में निहित एक-दूसरे के प्रति प्रेमभाव। कुछ तो एक परिवार के सदस्य की भाँति बड़े भाई जैसे हो गए, वहीं कुछ लोग छोटे भाई-बहन के जैसे। कुछ के साथ भेंट तो प्रथम बार थी, पर ऐसा प्रतीत होता है कि शायद पिछले कई जन्मों से ही जानता रहा हूँ।

मैं अभिभूत था कि बाबा के इस पावन क्षेत्र में जीवन के इन आनंदित करने वाले पलों का साक्षी बन रहा हूँ।

अत्यधिक वर्षा और ठंड के कारण मौसम बहुत परेशानी पैदा कर रहा था, पर जो चीज आसानी से प्राप्त हो जाए, उसमें क्या आनंद का वह भाव आ पाएगा? पूरे भारतवर्ष से आए विभिन्न लोग, चाहे बुजुर्ग हों या जवान, महिला हों या पुरुष, सभी अपने यथायोग्य साधनों के द्वारा आए थे और दर्शन करने के लिए आतुर थे।

ऊपर से भारी बारिश, फिसलन भरा ऊँचा-नीचा पहाड़ी रास्ता और पालकी के ऊपर से बरसाती ओढ़कर यात्रा करना क्या आसान है? बाद में तो उनके ऊपर बर्फ की मोटी परत भी जम गई थी, लेकिन यात्रा के जोश में कोई कमी नहीं थी। इस अकल्पनीय ठंड में काँपते हाथों व गीले चेहरों पर पड़ी बर्फ के बाद भी उनका उत्साह व ऊर्जा उन लोगों की दृढ़ आत्मशक्ति का परिचय दे रही थी।

यही वह आस्था की पराकाष्ठा है, जिसके पुनीत भाव ने इस भारतवर्ष को अनगिनत वर्षों से मातृतत्त्व के भाव से जोड़े रखा है। हम भारतीयों के लिए यह मात्र एक भूमि का टुकड़ा भर नहीं है— यह हमारी माँ है। जीवनपर्यंत भरण-पोषण करने वाली अपनी माँ से कौन प्यार नहीं करता है।

कई लोग तो अपने गृहस्थ जीवन की पूरी जिम्मेदारी निभाने के बाद निर्भय, सरल, स्वच्छंद मन और पूरे समर्पण के साथ, बिना तनाव व बिना जल्दबाजी के दर्शन के लिए पहुँचे हुए थे। झुर्रियों से लदा शरीर, भावविभोर मन और उनका उत्साह एक अलौकिक आभा उत्पन्न कर रहे थे।

बहुत से व्यक्ति ऐसे भी थे जिन्होंने ऐसी ठंड की कल्पना भी नहीं की थी। ऐसे में बहुत-सी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ आना स्वाभाविक ही है। इसे ध्यान में रखकर कुछ सेवामयी लोगों ने ऐसे दुर्गम स्थान पर एक चिकित्सालय प्रारंभ करने की सोची और आज यहाँ ऐसा दुष्कर व भगीरथ प्रयत्न सकुशल संपन्न हुआ है।

अब बहुत से लोगों की सहभागिता, समर्पण और मार्गदर्शन की वजह से 50 बिस्तरों का एक चिकित्सालय हमारे यात्री भक्तों के लिए समर्पित किया गया है, जहाँ आधुनिक सुविधाएँ व ठंड से बचने के लिए उचित व्यवस्था की गई है। उद्घाटन से पहले ही यहाँ की आकस्मिक सेवाओं का स्थान पूरी तरह से भर गया था। हेलीपैड के निकट होने की वजह से मरीज को दूसरे चिकित्सालय ले जाना भी आसान हो जाता है।

बाबा के श्रीचरणों में विनम्र भाव से प्रार्थना करता हूँ कि इस दिव्य स्थान पर आस्थावानों की आस्था, समर्थवान लोगों का सामर्थ्य, समर्पित लोगों का समर्पण, अर्थात् सभी का यथायोग्य अंशदान, इस पवित्र स्थान की सुगंध और भक्तों की निश्छल भक्ति को बाबा केदारनाथ का आशीर्वाद चिरकाल तक प्राप्त होता रहे, जिससे भक्तों की भक्ति, श्रद्धा और विश्वास आप पर अडिग रूप से बना रहे।


लेखक डॉ. भुवन चंद्र पाण्डेय, दिल्ली के प्रसिद्ध गंगाराम अस्पताल में बेहोशी (एनेस्थिसिया) के डॉक्टर हैं। ऑपरेशन टेबल पर मरीजों को रिलैक्स करने में उन्हें महारत हासिल है।