आजमगढ़ के सगड़ी की नई सुबह: खेल, हुनर और स्टार्टअप से बदल रही युवाओं की तस्वीर
आजमगढ़ का सगड़ी क्षेत्र एक ऐसे ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है, जो बेहद उत्साहजनक है। यह बदलाव आने वाले कल की एक नई और शानदार तस्वीर पेश कर रहा है। मालटारी से शुरू हुई एक छोटी सी चिंगारी अब गांव-गांव पहुँचकर युवा शक्ति की एक ऐसी मशाल बन गई है, जिसकी रोशनी दूर-दूर […]
आजमगढ़ का सगड़ी क्षेत्र एक ऐसे ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है, जो बेहद उत्साहजनक है। यह बदलाव आने वाले कल की एक नई और शानदार तस्वीर पेश कर रहा है। मालटारी से शुरू हुई एक छोटी सी चिंगारी अब गांव-गांव पहुँचकर युवा शक्ति की एक ऐसी मशाल बन गई है, जिसकी रोशनी दूर-दूर तक फैल रही है। ग्रामीण अंचल के हर कोने में अब एक नई ऊर्जा साफ महसूस की जा सकती है।
बदलाव के प्रेरणा स्रोत: डॉ. ओंकार राय
इस पूरे परिवर्तन के मुख्य प्रेरणा स्रोत डॉ. ओंकार राय हैं। तकनीक, नवाचार और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के क्षेत्र में उनका लंबा, समृद्ध और गौरवशाली अनुभव रहा है। जब देश के शीर्ष पदों पर कार्य करने वाला व्यक्ति अपने गृह क्षेत्र और ग्रामीण युवाओं से जुड़ता है, तो बदलाव सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि सीधे जमीन पर दिखाई देने लगता है। उनका यही समर्पण आज सगड़ी के युवाओं के लिए एक वरदान साबित हो रहा है।
एक विजन जो धरातल पर उतरा: खेल, हुनर और स्टार्टअप
भारत की असली ताकत और उसकी आत्मा उसके गांवों में बसती है। डॉ. ओंकार राय का यह स्पष्ट और दृढ़ विश्वास है कि यदि देश के युवाओं को सही दिशा और अवसर मिल जाए, तो वे किसी भी क्षेत्र में चमत्कार कर सकते हैं। इसी सोच के तहत सगड़ी में युवा संवाद और युवा क्लबों के माध्यम से युवाओं को संगठित किया जा रहा है।
“भारत की असली ताकत हमारे गांवों में बसती है और देश का भविष्य हमारे युवाओं के हाथ में है। जब हम सगड़ी में खेल, हुनर और स्टार्टअप के जरिए युवाओं को आगे बढ़ाते हैं, तो हमारा उद्देश्य सिर्फ उन्हें रोजगार देना नहीं, बल्कि उन्हें अपने क्षेत्र की तकदीर बदलने वाला उद्यमी बनाना होता है।” — डॉ. ओंकार राय
इस पूरी पहल का मूल आधार एक बहुत ही सरल, सटीक और प्रभावशाली त्रिकोण पर टिका है: खेल, हुनर और स्टार्टअप। यह मंत्र केवल तीन शब्द नहीं हैं, बल्कि यह ग्रामीण युवाओं के जीवन को बदलने का एक नया और व्यावहारिक तरीका है।
- खेल युवाओं में अनुशासन, ऊर्जा और टीम भावना जगाता है।
- हुनर उन्हें आधुनिक समय की माँग के अनुसार सक्षम और योग्य बनाता है।
- स्टार्टअप उन्हें नौकरी ढूंढने वाले के बजाय नौकरी देने वाला उद्यमी बनने का साहस देता है।
चंगईपुर से पुरुषोत्तमपुर कैथौली तक: गूंजता हुआ युवाओं का जोश
इस बदलाव की गति को यदि गहराई से महसूस करना हो, तो चंगईपुर और पुरुषोत्तमपुर कैथौली के गांवों का रुख करना होगा। हाल ही में जब इन गांवों में युवाओं के साथ संवाद का सिलसिला आगे बढ़ा, तो जो जीवंत तस्वीर उभरकर सामने आई, वह अद्भुत और अविस्मरणीय थी।
पुरुषोत्तमपुर कैथौली के युवाओं को जब खेलकूद की सामग्री प्रदान की गई, तो वह केवल कुछ उपकरणों का वितरण नहीं था। वह असल में उनके सपनों को पंख देने और उन्हें मैदान में उतरने का एक खुला निमंत्रण था। कुछ ही समय बाद, उन्हीं युवाओं को बड़ी संख्या में मैदान पर पूरी ऊर्जा के साथ खेलते हुए देखना किसी भी समाज के लिए गर्व और आत्मिक संतोष का क्षण होता है।
“पुरुषोत्तमपुर कैथौली में जब मैंने युवाओं को खेल सामग्री मिलने के बाद मैदान पर इतनी बड़ी संख्या में खेलते देखा, तो मेरा दिल खुशी से भर गया। यह अनुभव हमें यह सिखाता है कि यदि हमारे युवाओं को सही समय पर थोड़ा सा प्रोत्साहन और उचित संसाधन मिल जाएं, तो वे खुद अपनी पहल को आगे बढ़ाने की पूरी क्षमता रखते हैं।” — डॉ. ओंकार राय
यह दृश्य इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि हमारे गांवों के युवाओं में प्रतिभा और ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। उन्हें केवल थोड़े से प्रोत्साहन, सही मार्गदर्शन और बुनियादी संसाधनों की आवश्यकता होती है। जब ये चीजें मिलती हैं, तो युवा खुद अपनी तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने की पूरी क्षमता रखते हैं।
खेल का मैदान: सिर्फ पसीना नहीं, बल्कि अनुशासन का सबसे बड़ा सबक
मैदान पर जब गांव के युवाओं को पसीना बहाते और एक-दूसरे का साथ देते हुए देखा जाता है, तो यह समझ आता है कि खेल का मैदान केवल शारीरिक तंदुरुस्ती का केंद्र नहीं है। यह असल में सामाजिक और मानसिक विकास की एक ऐसी पाठशाला है, जहां जीवन के सबसे बड़े सबक सीखे जाते हैं।
जब अलग-अलग परिवारों, पृष्ठभूमियों और परिवेश के युवा एक टीम के रूप में मैदान पर उतरते हैं, तो उनके बीच की हर तरह की दूरियां और दीवारें स्वतः समाप्त हो जाती हैं। वे साथ मिलकर हारना सीखते हैं, जीत का सामूहिक जश्न मनाते हैं और सबसे बढ़कर एक-दूसरे की ताकत बनना सीखते हैं। यह अनुशासन और आपसी भाईचारा उनके दैनिक जीवन में भी झलकता है, जिससे पूरा ग्रामीण समाज सकारात्मक रूप से प्रभावित होता है।
हुनर और स्टार्टअप का नया क्षितिज: पारंपरिक सोच से आधुनिक दिशा तक
सगड़ी की इस अनूठी यात्रा का अगला और सबसे महत्वपूर्ण चरण युवाओं को रोजगार के परंपरागत दायरे से बाहर निकालना है। आज का दौर तकनीक और नवाचार का है। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को आधुनिक डिजिटल और व्यावसायिक कौशल से लैस किया जा रहा है।
जब एक गांव का युवा स्टार्टअप की बात करता है, तो वह केवल व्यक्तिगत सफलता की नहीं सोच रहा होता, बल्कि वह अपने क्षेत्र की किसी स्थानीय समस्या का समाधान ढूंढ रहा होता है। डॉक्टर ओंकार राय के मार्गदर्शन में यह पहल युवाओं को पारंपरिक लीक से हटकर नए रास्ते चुनने के लिए प्रेरित कर रही है। जब युवा तकनीक और स्टार्टअप की बारीकियों को समझते हैं, तो वे स्थानीय स्तर पर ऐसे रोजगार के अवसर पैदा करते हैं जो पूरे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकते हैं।

यह यात्रा अभी एक शुरुआत है: एक सुनहरे भविष्य की आहट
सगड़ी की मिट्टी से उठी यह पहल आज भले ही कुछ गांवों तक सीमित लग रही हो, लेकिन इसकी गूंज दूर तक सुनाई दे रही है। मालटारी से शुरू हुआ यह कारवां अब गांव-गांव अपनी सफलता की नई इबारत लिख रहा है। डॉ. ओंकार राय के नेतृत्व और दूरदर्शी मार्गदर्शन में सगड़ी के युवाओं के भीतर जो नया विश्वास और आत्मविश्वास जागा है, वह आने वाले समय में एक बड़े सामाजिक बदलाव का आधार बनेगा।
सगड़ी के इन ऊर्जावान युवाओं की चमकती आँखें, उनका बुलंद हौसला और कुछ कर गुजरने की जिजीविषा यह चीख-चीखकर कहती है कि यदि देश के हर ग्रामीण अंचल में इसी तरह का सकारात्मक नेतृत्व मिल जाए, तो भारत को वैश्विक पटल पर एक नई ऊँचाई पर पहुँचने से कोई नहीं रोक सकता। यह बदलाव अब रुकने वाला नहीं है, क्योंकि सगड़ी का युवा अब जाग चुका है, समझ चुका है और अपने सपनों को खुद सच करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
डॉ. ओंकार राय: एक संक्षिप्त परिचय और उनका प्रेरणादायी सफर
- वर्तमान भूमिका व जुड़ाव: आजमगढ़ के सगड़ी क्षेत्र के मौकुतुबपुर से ताल्लुक रखने वाले डॉ. ओंकार राय अपने गृह क्षेत्र के विकास, ग्रामीण युवाओं के उत्थान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।
- ओडिशा में स्टार्टअप का नेतृत्व: उन्होंने अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2024 तक ओडिशा सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के अधीन आने वाली संस्था स्टार्टअप ओडिशा के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनके नेतृत्व में ओडिशा के स्टार्टअप इकोसिस्टम का अभूतपूर्व विस्तार हुआ। उन्होंने राज्य के प्रमुख बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर ‘ओ-हब’ के विकास और महिला उद्यमियों को आगे बढ़ाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इन शानदार कार्यों के लिए उन्हें वर्ष 2024 के ‘स्टेट बिजनेस लीडरशिप अवार्ड’ से भी सम्मानित किया गया था।
- केंद्रीय स्तर पर प्रशासनिक अनुभव: स्टार्टअप ओडिशा के कार्यकारी अध्यक्ष बनने से पहले, वे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन आने वाली प्रतिष्ठित संस्था सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया के महानिदेशक के रूप में भी देश को अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके हैं।
- निष्कर्ष व प्रभाव: अपने लंबे और गौरवशाली कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश भर में तकनीकी स्टार्टअप्स, सूचना प्रौद्योगिकी पार्कों और डिजिटल नवाचार को जबरदस्त बढ़ावा दिया। आज वे अपने उसी राष्ट्रीय स्तर के अनुभव, दूरदृष्टि और आधुनिक विजन को सगड़ी के गांवों में खेल, हुनर और स्टार्टअप के रूप में पूरी निष्ठा के साथ धरातल पर उतार रहे हैं।
- आजमगढ़
- डॉ. ओंकार राय
- स्टार्ट अप इंडिया