विश्व हेपेटाइटिस दिवस: ILBS की पहल, बच्चों और मरीजों ने लिया लिवर सुरक्षा का संकल्प

इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायिलरी साइंसेज (ILBS) ने इस साल विश्व हेपेटाइटिस दिवस के मौके पर एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया। इस आयोजन का मुख्य मकसद लोगों को लिवर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से बचाना था। वसंत कुंज स्थित इस संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में स्कूली बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों, […]

इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायिलरी साइंसेज (ILBS) ने इस साल विश्व हेपेटाइटिस दिवस के मौके पर एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया। इस आयोजन का मुख्य मकसद लोगों को लिवर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी से बचाना था। वसंत कुंज स्थित इस संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में स्कूली बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों, मरीजों और उनके परिवारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस साल की वैश्विक थीम “Hepatitis: Let’s Break It Down” रखी है। इसका सीधा मतलब हेपेटाइटिस से बचाव, जांच और इलाज के रास्ते में आने वाली हर सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी रुकावट को तोड़ना है।

स्कूली बच्चों के लिए वेबिनार

कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों के लिए एक विशेष ऑनलाइन वेबिनार से हुई। इसे ILBS ने भारत लोक शिक्षा परिषद और एकल भारत मीडिया फाउंडेशन (एकल अभियान) के साथ मिलकर आयोजित किया। इसमें एकल अभियान नेटवर्क से जुड़े कई स्कूलों के बच्चे, शिक्षक और उनके अभिभावक शामिल हुए।

वेबिनार में ILBS के निदेशक प्रो. (डॉ.) शिव कुमार सरीन ने लिवर स्वास्थ्य पर एक खास और सरल लेक्चर दिया। उन्होंने बताया कि लिवर को स्वस्थ कैसे रखें। उन्होंने हेपेटाइटिस के फैलने के कारणों, शुरुआती जांच, बचाव, टीकाकरण और अच्छी जीवनशैली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

लेक्चर के बाद एक जीवंत सवाल-जवाब का सत्र हुआ। इसमें बच्चों और शिक्षकों ने हेपेटाइटिस और रोज़मर्रा की आदतों से जुड़े कई सवाल पूछे। इसी मौके पर एकल अभियान के सभी स्कूलों में “स्वस्थ जिगर, स्वस्थ बचपन” थीम पर एक राष्ट्रव्यापी आर्ट प्रतियोगिता कराने का ऐलान भी किया गया।

मरीजों के साथ सीधा संवाद

ILBS अस्पताल परिसर में भी दिन भर कई गतिविधियां चलीं। यहाँ आए मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक विशेष संवाद सत्र हुआ। इसमें प्रो. (डॉ.) शिव कुमार सरीन और डॉ. मनोज शर्मा ने मरीजों के सवालों के सीधे और आसान जवाब दिए। डॉक्टरों ने लिवर की बीमारियों के शुरुआती लक्षणों, सही खान-पान और बचाव के उपायों पर खुलकर बात की।

लोगों की जानकारी बढ़ाने के लिए एक मजेदार क्विज़ सेशन रखा गया। इसके अलावा आसान भाषा में लिवर सुरक्षा के नियम समझाने के लिए “लिवर ज्ञान” गतिविधि पेश की गई।

समय पर पहचान को बढ़ावा देने के लिए अस्पताल में हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी की मुफ़्त जांच के विशेष स्क्रीनिंग कॉर्नर बनाए गए। दोनों बीमारियां सालों तक बिना किसी लक्षण के शरीर में छिपी रहती हैं। जब तक मरीज को पता चलता है, तब तक लिवर को बड़ा नुकसान हो चुका होता है। इसीलिए समय पर जांच बहुत जरूरी है।

लीवर सुरक्षा का सामूहिक संकल्प

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण संकल्प समारोह रहा। इसमें ऑनलाइन जुड़े बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ अस्पताल में मौजूद मरीजों, उनके परिजनों और डॉक्टरों ने एक साथ मिलकर प्रतिज्ञा ली।

सबने एक सुर में दोहराया: “मैं अपने लिवर का ख्याल रखूंगा।”

क्यों गंभीर हेपेटाइटिस की चुनौती?

WHO की ग्लोबल हेपेटाइटिस रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, साल 2024 में दुनिया भर में करीब 28.7 करोड़ लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस बी या सी से पीड़ित थे। उसी साल लिवर सिरोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों से 13 लाख लोगों की मौत हो गई। क्रोनिक हेपेटाइटिस बी से पीड़ित 24 करोड़ लोगों में से 5 प्रतिशत से भी कम मरीजों का इलाज हो पा रहा था। भारत के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक है। दुनिया भर में हेपेटाइटिस बी से होने वाली कुल मौतों में से 69 प्रतिशत मौतें जिन 10 प्रमुख देशों में होती हैं, भारत उनमें शामिल है।

ILBS के बारे में

इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायिलरी साइंसेज (ILBS) दिल्ली सरकार का एक स्वायत्त सुपर-स्पेशियलिटी संस्थान है। यह लिवर और पित्त की बीमारियों के इलाज, रिसर्च और ट्रेनिंग के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का सहयोगी केंद्र भी है। इस आयोजन के जरिए ILBS ने लिवर स्वास्थ्य और हेपेटाइटिस नियंत्रण की दिशा में एक और बड़ा और मजबूत कदम बढ़ाया है।

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