ADG राजा बाबू की पहल: MP पुलिस की ट्रेनिंग में ‘गीता’ और ‘रामचरित मानस’ का पाठ
मध्य प्रदेश पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में इन दिनों एक नई और अनूठी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। यह पहल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) प्रशिक्षण, राजा बाबू सिंह ने की है। उन्होंने प्रदेश के आठों पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में प्रशिक्षण ले रहे नव चयनित 4,000 कांस्टेबलों को नियमित रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ पढ़ाने […]
मध्य प्रदेश पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में इन दिनों एक नई और अनूठी पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। यह पहल अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) प्रशिक्षण, राजा बाबू सिंह ने की है। उन्होंने प्रदेश के आठों पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में प्रशिक्षण ले रहे नव चयनित 4,000 कांस्टेबलों को नियमित रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ पढ़ाने का आदेश दिया है।
इसी साल जुलाई महीने में रामचरितमानस के नियमित पाठ के बाद अब गीता पाठ का यह आदेश आया है। यह पुलिसकर्मियों को बेहतर बनाने, अनुशासित करने और तनावमुक्त जीवन जीने की कला सिखाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजा बाबू सिंह 1994 बैच के बेहद अनुभवी आईपीएस अधिकारी हैं। वे पुलिस ट्रेनिंग में नए तरीकों और नए प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं। सीमा सुरक्षा बल (BSF) में रहते हुए भी उन्होंने ट्रेनिंग में कई प्रभावी पहल की थीं। वे मानते हैं कि पुलिसिंग केवल शारीरिक और कानूनी प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह नैतिक मूल्यों, चरित्र निर्माण और मानसिक संतुलन से भी जुड़ी हुई है।

गीता और रामचरितमानस क्यों?
मध्य प्रदेश के 8 ट्रेनिंग स्कूलों में नव चयनित 4,000 से अधिक कांस्टेबलों की मुश्किल ट्रेनिंग इस साल जुलाई महीने में शुरू हुई। ट्रेनिंग की शुरुआत में ही एडीजी राजा बाबू सिंह ने रामचरितमानस के नियमित पाठ का आदेश दिया। इसकी वजह बहुत रोचक थी। ट्रेनिंग की शुरुआत से ही कई रंगरूटों को घर की याद सताने लगी। इन्होंने घर के पास के ट्रेनिंग सेंटर में ट्रांसफर की अर्जी लगा दी।
राजा बाबू सिंह ने बहुत ही बुद्धिमानी से इसका हल निकाला। यह रंगरूटों के लिए एक इमोशनल चैलेंज था। एक बेहतर लीडर का परिचय देते हुए वह खुद आगे आए। होमसिकनेस से ग्रस्त जवानों से बात की और इस समस्या के हल के लिए उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जीवन का सहारा लिया।
उन्होंने प्रशिक्षु जवानों से पूछा, “अगर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम पिता के एक वचन को पूरा करने के लिए 14 साल का लंबा वनवास काट सकते हैं, हर मुश्किल का सामना कर सकते हैं, तो आप अपने राज्य और देश की सेवा के लिए केवल नौ महीने के ट्रेनिंग पीरियड में घर से दूर क्यों नहीं रह सकते?” उनके इस सवाल का जवानों के पास कोई जवाब तो था नहीं, उल्टे इस सवाल ने रंगरुटों को प्रेरित किया। सिर्फ एक सवाल का असर देखकर राजा बाबू ने तय कर लिया कि ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षु जवानों को रामचरित मानस का पाठ पढ़ाया जाएगा।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का त्याग, 14 वर्षों का मुश्किल वनवास प्रशिक्षुओं में अनुशासन और चरित्र निर्माण की भावना विकसित करेगा। राम का जीवन, एक आदर्श पुत्र, भाई, पति और राजा का उदाहरण प्रस्तुत करता है। भगवान राम के चरित्र से प्रेरणा लेकर रुगरुट नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा और मर्यादा जैसे मूल्यों की शिक्षा को जीवन में उतार सकेंगे। – राजा बाबू सिंह, (ADG) प्रशिक्षण, मध्य प्रदेश

रामचरित मानस के बाद गीता ज्ञान
अब नवंबर के महीने में एडीजी राजा बाबू सिंह ने सभी पुलिस ट्रेनिंग सेंटर्स में दैनिक ध्यान सत्र से ठीक पहले भगवद्गीता के एक अध्याय का पाठ कराने को कहा है। यह आदेश भगवान कृष्ण के प्रिय माह मार्गशीर्ष (अगहन कृष्ण) में आया है, जो एक और रोचक पहलू है।
गीता को ‘जीवन का सार’ माना जाता है। गीता धैर्य, संतुलन और संयम का संदेश देती है। इसके पाठ से पुलिसकर्मियों को हर परिस्थिति में निष्पक्ष रूप से अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा भी मिलती है। यह उन्हें तनावमुक्त रहने और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करेगा, जो पुलिस जैसे अत्यधिक दबाव वाले पेशे के लिए अत्यंत आवश्यक है। – राजा बाबू सिंह, (ADG) प्रशिक्षण, मध्य प्रदेश
बेहतर ट्रेनिंग के अन्य कदम
एडीजी राजा बाबू सिंह सिर्फ सनातन और धार्मिक ग्रंथों तक ही सीमित नहीं हैं। उनका फोकस पुलिस ट्रेनिंग को समग्र बनाने पर है। उनका लक्ष्य है कि नौ महीने की बेसिक ट्रेनिंग के बाद जब ये 4,000 कांस्टेबल फील्ड में आएं, तो वे न केवल शारीरिक रूप से फिट हों, बल्कि मानसिक और नैतिक रूप से भी मजबूत हों।
- साइबर और तकनीकी प्रशिक्षण: नए जमाने के अपराधों से निपटने के लिए, ट्रेनिंग में साइबर क्राइम और अन्य टेक्नोलॉजिकल पहलुओं से संबंधित कई नए विषय जोड़े गए हैं।
- हार्टफुलनेस मेडिटेशन: तनाव को कम करने और मानसिक शांति के लिए, मूल्य-आधारित विषयों के तहत हार्टफुलनेस मेडिटेशन (ध्यान) को भी दैनिक रूटीन का हिस्सा बनाया गया है।
- आईक्यू और ईक्यू पर ध्यान: एडीजी का जोर इंटेलिजेंस क्वेश्चन्ट (IQ) के साथ-साथ इमोशनल क्वेश्चन्ट (EQ) पर भी है, ताकि जवान भीड़ या विपरीत परिस्थितियों में अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए सही निर्णय ले सकें।

पुलिसिंग में प्रयोगों का लंबा सफर
राजा बाबू सिंह के ट्रेनिंग में नए प्रयोगों का इतिहास नया नहीं है। बीएसएफ कार्यकाल के दौरान भी वह ट्रेनिंग में नवाचारों के लिए जाने जाते थे, जिससे जवानों का मनोबल और अनुशासन बढ़ा।
2019 में जब वह ग्वालियर रेंज के पुलिस प्रमुख थे, तब भी उन्होंने एक ऐसा ही अभियान शुरू किया था। उस दौरान उन्होंने स्थानीय जेलों में बंद कैदियों और अन्य लोगों के बीच भगवद्गीता की प्रतियां वितरित की थीं, जिसका उद्देश्य उनमें नैतिक सुधार लाना था।
पहल पर प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कई हिंदू धर्मगुरुओं ने इस पहल का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि गीता किसी एक धर्म का ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का सार है और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देती है। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने इसे नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जुड़ने वाला कदम बताया है।
एडीजी राजा बाबू सिंह द्वारा शुरू की गई यह पहल भारतीय पुलिस व्यवस्था में एक साहसिक कदम है, जो इस बात पर जोर देता है कि पुलिस को सिर्फ कानून का रक्षक नहीं, बल्कि एक नेक और अनुशासित नागरिक भी होना चाहिए।
ADG राजा बाबू सिंह की अगुआई में इन पहलों ने एमपी पुलिस-प्रशिक्षण को सिर्फ “हथियार-शिक्षा” का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण-प्रचारणा का मैदान बना दिया है। अगर यह सही तरीके से और संवेदनशील तरीके से आगे बढ़े, तो आने वाले वर्षों में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा-स्रोत भी बन सकता है।
- ADG राजा बाबू सिंह
- गीता
- मध्य प्रदेश
- रामचरित मानस