RML दिल्ली में दिमाग का सटीक ट्रैकिंग सिस्टम, मरीजों का इलाज हुआ आसान

दिल्ली में पहली बार देश के किसी सरकारी Physical Medicine & Rehabilitation (PMR) विभाग में न्यूरोमॉड्यूलेशन प्रयोगशाला और फुट प्रेशर एनालिसिस लैब शुरू हुई है। यह नई लैब राम मनोहर लोहिया अस्पताल के PMR विभाग में स्थापित की गई है। न्यूरोमॉड्यूलेशन क्या है? यह तकनीक मरीज की MRI छवियों का उपयोग करके मस्तिष्क के सटीक […]

दिल्ली में पहली बार देश के किसी सरकारी Physical Medicine & Rehabilitation (PMR) विभाग में न्यूरोमॉड्यूलेशन प्रयोगशाला और फुट प्रेशर एनालिसिस लैब शुरू हुई है। यह नई लैब राम मनोहर लोहिया अस्पताल के PMR विभाग में स्थापित की गई है।

न्यूरोमॉड्यूलेशन क्या है?

यह तकनीक मरीज की MRI छवियों का उपयोग करके मस्तिष्क के सटीक हिस्से को मिलीमीटर स्तर तक निशाना बनाती है। इसका मतलब है कि डॉक्टर मस्तिष्क के किसी विशेष क्षेत्र को सही तरीके से ट्रैक कर उपचार दे सकते हैं। यह प्रक्रिया वास्तविक समय में निगरानी और ट्रैकिंग के जरिए की जाती है, जिससे इलाज अधिक प्रभावी और सुरक्षित होता है।

न्यूरोमॉड्यूलेशन के लाभ

इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह नॉन-इनवेसिव है यानी मरीज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। इसका प्रयोग स्ट्रोक, मस्तिष्क चोट, स्पास्टिसिटी, दीर्घकालिक दर्द और मूवमेंट डिसऑर्डर्स में होता है। यह मस्तिष्क की पुनर्संरचना में मदद करता है और मरीज के कार्यात्मक सुधार को तेज करता है। इससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है और पुनर्वास की अवधि कम होती है।

फुट प्रेशर एनालिसिस लैब क्या करती है?

यह लैब मरीज की चलने की चाल (गैट), पैरों पर दबाव, और संतुलन का वैज्ञानिक मूल्यांकन करती है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है जिनकी गतिशीलता सीमित है, डायबिटिक फुट जटिलताएँ हैं, या जो खेल चोटों से जूझ रहे हैं। इसके जरिए डॉक्टर मरीज के चलने और पैर पर दबाव का विश्लेषण कर बेहतर इलाज योजना बना सकते हैं।

अस्पताल के अधिकारियों के विचार

राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि ये तकनीकें पुनर्वास सेवाओं को नए स्तर पर ले जाएंगी। उन्होंने बताया कि यह पहल संस्थान को देश में अग्रणी बनाने में मदद करेगी।

डॉ. शिप्रा चौधरी, विभाग प्रमुख ने कहा कि यह लैब मरीजों की देखभाल और पुनर्वास में नई दिशा तय करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल शोध और प्रशिक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

इस तकनीक का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से उपचार अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी होगा। इससे मरीजों की रिकवरी तेज होगी और पुनर्वास सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी।

उद्घाटन समारोह में उपस्थित अधिकारी

इस मौके पर डॉ. विवेक देवान (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट), डॉ. कौशल त्यागी (एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट), और Physical Medicine & Rehabilitation (PMR) विभाग की हेड डॉ. शिप्रा चौधरी मौजूद थे। कार्यक्रम अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।

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