यूपी सरकार ने दिया मुकेश शुक्ला को सम्मान, दिव्यांगजन के जीवन में बदलाव लाने वाले कामों की पहचान
विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पेशल ओलंपिक भारत – उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मुकेश शुक्ला को राज्य का प्रमुख सम्मान प्रदान किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में उन्हें “दिव्यांगजन के कल्याण में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत योगदान” पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके उन प्रयासों […]
विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पेशल ओलंपिक भारत – उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मुकेश शुक्ला को राज्य का प्रमुख सम्मान प्रदान किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित समारोह में उन्हें “दिव्यांगजन के कल्याण में सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत योगदान” पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके उन प्रयासों की स्वीकृति है, जिनसे दिव्यांगजन के जीवन में वास्तविक परिवर्तन आया है।
खेल से बढ़ता आत्मविश्वास
स्पेशल ओलंपिक भारत – यूपी के माध्यम से मुकेश शुक्ला ने खेल को दिव्यांगजन के जीवन में मजबूती से जोड़ा। राज्यभर में आयोजित खेल प्रशिक्षण, टीम तैयारियों और शिविरों ने हजारों बच्चों और युवाओं को प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर दिया। इन गतिविधियों ने उनमें न केवल खेल कौशल विकसित किया, बल्कि आत्मविश्वास और समाज में पहचान का अहसास भी बढ़ाया।

नियमित स्वास्थ्य जांच पहल
मुकेश शुक्ला ने दिव्यांगजन के लिए नियमित स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों पर लगातार काम किया। इन पहलों का उद्देश्य केवल जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सुनिश्चित करना रहा कि हर बच्चा और युवक बेहतर स्वास्थ्य के साथ आगे बढ़ सके। स्वास्थ्य को खेल और जीवन कौशल से जोड़ने का उनका प्रयास दिव्यांगजन के संपूर्ण विकास को मजबूत करता है।
रोजगार से मिलेगी आत्मनिर्भरता
दिव्यांगजन की सशक्तिकरण यात्रा तब तक अधूरी है जब तक उन्हें रोजगार और आजीविका से नहीं जोड़ा जाए। इस सोच के साथ मुकेश शुक्ला ने रोजगार से संबंधित कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त कर दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बन सकें और अपने जीवन में सम्मानजनक स्थान प्राप्त कर सकें।

समावेशन उनकी मूल सोच
इन सभी पहलों के पीछे समावेशन की मूल भावना है। दिव्यांगजन को सहानुभूति नहीं, बल्कि बराबरी का दर्जा मिले। उनके नेतृत्व में यह दृष्टि केवल शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण इलाकों तक पहुंचते हुए हजारों दिव्यांगजन को अवसर, आत्मविश्वास और समाज में सम्मान मिला।
दिव्यांगजन भारत की शक्ति
सम्मान प्राप्त करने के बाद मुकेश शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा यह मान्यता उनके संकल्प को और मजबूत करती है। उन्होंने समाज से अपील की, “हर संस्था को प्रति वर्ष दिव्यांगजन के लिए कम से कम एक ठोस पहल अवश्य करनी चाहिए। यदि समाज हाथ बढ़ाए, तो दिव्यांगजन कुछ ही वर्षों में और आत्मनिर्भर बनकर चुनौतियों को पीछे छोड़ देंगे।” उनका स्पष्ट मानना है कि भारत की दस प्रतिशत दिव्यांग आबादी को सशक्त किए बिना देश का विकास अधूरा रहेगा।

सम्मान साहस को समर्पित
मुकेश शुक्ला ने यह सम्मान अपने माता-पिता, स्पेशल ओलंपिक भारत की अध्यक्ष मल्लिका नड्डा और उन तमाम दिव्यांगजन को समर्पित किया। “जिनका साहस और जज्बा ही मेरे काम की असली प्रेरणा है।”
एक व्यक्ति, हजारों बदले जीवन
मुकेश शुक्ला का सफर यह साबित करता है कि सामाजिक परिवर्तन सरकारी योजनाओं से आगे बढ़कर व्यक्तिगत प्रतिबद्धता से भी आता है। उनकी पहलें केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनशील समाज निर्माण का अभियान रही हैं—जहाँ दिव्यांगजन को सहारा नहीं, बल्कि साथ देने की सोच पैदा हुई। प्रदेश सरकार द्वारा मिला यह राज्य सम्मान उनके अब तक के कार्यों की पहचान है, और आने वाले समय में अनेक नई शुरुआतों की उम्मीद भी।
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