क्लास में सबसे पीछे बैठने वाले लड़के से IPS बनने की अमित सिंह की कहानी
“अगर मैं कर सकता हूं, तो हर छात्र कर सकता है। हार मत मानो, मेहनत और विश्वास से मंज़िल जरूर मिलती है।” — IPS अमित सिंह मैं अमित सिंह, आज इंदौर का एडिशनल पुलिस कमिश्नर हूं। लेकिन मेरी कहानी किसी चमकते सितारे जैसी नहीं थी। स्कूल के दिनों में मैं अक्सर क्लास में पीछे बैठता, […]
“अगर मैं कर सकता हूं, तो हर छात्र कर सकता है। हार मत मानो, मेहनत और विश्वास से मंज़िल जरूर मिलती है।” — IPS अमित सिंह
मैं अमित सिंह, आज इंदौर का एडिशनल पुलिस कमिश्नर हूं। लेकिन मेरी कहानी किसी चमकते सितारे जैसी नहीं थी। स्कूल के दिनों में मैं अक्सर क्लास में पीछे बैठता, कमजोर समझा जाता और खुद पर भरोसा खो बैठता। फिर भी, हर असफलता और चुनौती ने मुझे मजबूत बनाया। आज मैं खुद बता रहा हूं, मेहनत, विश्वास और सही मार्गदर्शन से कैसे मैंने सफलता हासिल की।
बचपन और स्कूली शिक्षा — संघर्ष और सीख
मैं उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला हूं। मेरी स्कूली शुरुआत स्थानीय सरकारी स्कूलों में हुई। संसाधन सीमित थे — लाइब्रेरी, कंप्यूटर जैसी सुविधाएँ कम थीं। लेकिन मेरे माता-पिता ने हमेशा शिक्षा को सर्वोपरि रखा।
मैं क्लास में अक्सर पीछे बैठता। शिक्षक अक्सर नाराज़ होते, डांट लगाते, और कभी-कभी मैं खुद पर भरोसा खो बैठता। लेकिन अब समझ गया हूं कि यह सब मेरे लिए सीख का हिस्सा था। मेहनत ही फर्क डालती है, और यही सबसे बड़ी सीख थी। स्कूल में शिक्षक कभी-कभी कठोर भी थे, लेकिन मेरे लिए वही अनुभव मेरी दिशा बदलने वाला साबित हुआ।
स्कूल के समय मैंने खेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भाग लिया। इन्हीं गतिविधियों ने मुझे नेतृत्व और टीम भावना सिखाई। मैं आज भी कहता हू — ‘मैंने खेलों से सीखा कि हार से डरना नहीं चाहिए, और टीमवर्क सफलता का हिस्सा है। असफलता हमेशा अस्थायी होती है।’

इलाहाबाद विश्वविद्यालय — दिशा बदलने वाला मोड़
स्कूल की शिक्षा पूरी करने के बाद मैंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। यह जीवन का निर्णायक मोड़ था। विश्वविद्यालय का माहौल पूरी तरह अलग था। यहां किताबें थी, बहस थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी थी और नए-नए दोस्त भी। विश्वविद्यालय का माहौल चुनौतीपूर्ण और प्रेरक दोनों था। यहां मुझे इतिहास विभाग के जाने-माने प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी का मार्गदर्शन मिला। मैं हमेशा उन्हें याद करता हूं।
“प्रो. तिवारी सर ने मुझसे कहा, ‘अमित, तुम कर सकते हो, बस खुद पर विश्वास रखो।’ यह शब्द मेरे जीवन का मोड़ बन गया।”

सिविल सेवा की तैयारी — संघर्ष और धैर्य
“इलाहाबाद में समय बहुत चुनौतीपूर्ण था। आसपास के छात्र बहुत प्रतिभाशाली थे, लेकिन मैंने सीखा कि दूसरों से प्रतिस्पर्धा करने से बेहतर है कि खुद को बेहतर बनाओ। यही सोच मुझे IPS की राह पर ले गई।“
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी मेरे लिए आसान नहीं थी। मैंने सीखा कि लक्ष्य निर्धारित करना और लगातार मेहनत करना सफलता की कुंजी है। मैंने इतिहास और दर्शनशास्त्र विषय चुना। मेरी दिनचर्या थी, सुबह 5 बजे उठना और अखबार पढ़ना। उसके बाद दिन में छात्रों को पढ़ाता था और फिर शाम और रात में खुद की तैयारी में जुट जाता था। पहले और दूसरे प्रयास में प्रारम्भिक परीक्षा में भी सफलता नहीं मिली। तीसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा में असफल रहा। चौथे और आखिरी प्रयास में 2009 में मेरा यूपीएससी में चयन हुआ। देश की इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में मेरी 144 रैंक आयी और IPS बना।
UPSC की सूची में अपना नाम देखकर मैं रो पड़ा। मेरे शिक्षक याद आए जिन्होंने कभी डांट लगाई थी। उसी डांट में छिपा प्रेम और विश्वास मुझे यहां तक ले आया।
आईपीएस जीवन — जनता के बीच सेवा
“पुलिस सिर्फ डर का प्रतीक नहीं, बल्कि विश्वास का प्रतीक भी होनी चाहिए।” – IPS अमित सिंह
मध्य प्रदेश कैडर में मेरी पहली पोस्टिंग टीकमगढ़ SP के रूप में हुई। मैंने जनता के बीच जाकर प्रत्यक्ष संवाद शुरू किया। इसके बाद मैं खरगोन, रतलाम और दो बार जबलपुर एसपी रहा। कोरोना काल में जबलपुर में मैंने “जन संवाद मंच” शुरू किया, जहां ऑनलाइन और आमने-सामने शिकायतें सुनी और हल की गईं।

नशा मुक्ति और अपराध नियंत्रण
मैंने नशे के खिलाफ अभियान में अनोखा तरीका अपनाया। मैंने भेष बदलकर नशे के अड्डों में जाकर कार्रवाई की। बाद में डीआईजी (नारकोटिक्स) बना और अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क को तोड़ा। मेरी कार्यशैली को “डायनेमिक पुलिसिंग” कहा गया। मैंने हथियार तस्करी, माओवादी गतिविधियों और साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया।
इंदौर में एडिशनल पुलिस कमिश्नर — नई जिम्मेदारी
“पुलिस सिर्फ नियम बनाने वाली संस्था नहीं है। यह जनता का विश्वास जीतने वाली संस्था है। यदि जनता आपके साथ है, तो अपराधी हार जाते हैं।” मार्च 2024 में मुझे इंदौर महानगर में कानून-व्यवस्था का एडिशनल पुलिस कमिश्नर बनाया गया। मैंने महिला सुरक्षा, ट्रैफिक अनुशासन और साइबर सुरक्षा पर विशेष पहलें शुरू की।

हर छात्र के लिए संदेश
मैं वही अमित हूं जिसे कभी क्लास में कमजोर कहा गया। फर्क सिर्फ इतना है — अब वही कमजोरी मेरी ताकत बन चुकी है। अगर मैं कर सकता हूं, तो हर छात्र कर सकता है। हार मत मानो, मेहनत और विश्वास से मंज़िल जरूर मिलती है।
सफलता के सूत्र — मेरी जुबानी
- कमज़ोरी को बहाना नहीं, सीख बनाओ।
- गुरु की प्रेरणा और मार्गदर्शन अपनाओ।
- स्पष्ट लक्ष्य तय करो और लगातार मेहनत करो।
- नए तरीके अपनाओ, पुराने नियमों में फंसो मत।
- जनता के साथ संवाद करो, डर नहीं बल्कि भरोसा बनाओ।
- IPS अमित सिंह
- इंदौर
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- सक्सेस मंत्रा