कौन हैं कैप्टन रितिका खरेता, जिन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी संग निभाई बड़ी जिम्मेदारी

15 अगस्त की वह ऐतिहासिक सुबह। दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला और 21 तोपों की गड़गड़ाहट। राष्ट्रगान की धुन के बीच देश का तिरंगा फहराया जा रहा था। ठीक इसी समय प्रधानमंत्री के बगल में सधे हुए सैन्य अंदाज में एक अधिकारी खड़ी थीं। बेहद शांत चेहरा और आत्मविश्वास से भरी आंखें। वह थीं भारतीय […]

15 अगस्त की वह ऐतिहासिक सुबह। दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला और 21 तोपों की गड़गड़ाहट। राष्ट्रगान की धुन के बीच देश का तिरंगा फहराया जा रहा था। ठीक इसी समय प्रधानमंत्री के बगल में सधे हुए सैन्य अंदाज में एक अधिकारी खड़ी थीं। बेहद शांत चेहरा और आत्मविश्वास से भरी आंखें। वह थीं भारतीय थल सेना की ‘कोर ऑफ सिग्नल्स’ की जांबाज सैन्य अधिकारी कैप्टन रितिका खरेता। लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रध्वज फहराने के इस राष्ट्रीय समारोह में सैन्य सहयोग देना देश के सर्वोच्च मान-सम्मान की बात होती है।

जनवरी 2025 में 76वें गणतंत्र दिवस पर यही अधिकारी कर्तव्य पथ पर 146 पुरुष सैनिकों के दस्ते की कमान संभालकर इतिहास रच चुकी थीं।

कैप्टन रितिका की उपलब्धियों की सूची बेहद शानदार है। कर्तव्य पथ पर पुरुषों की पूरी टुकड़ी की अकेली महिला कमांडर बनना हो या लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रीय समारोह में जिम्मेदारी निभाना हो, उन्होंने हर जगह अपनी काबिलियत साबित की है।

दिल्ली की गलियों से सेना का सपना

कैप्टन रितिका खरेता का जन्म और पालन-पोषण देश की राजधानी दिल्ली में हुआ। उनका परिवार बहुत ही सादा और अनुशासित है। पिता की खाकी और मां की सीख ने बचपन में उनकी एक पुख्ता नींव तैयार की। उनके पिता दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात रहे हैं। उनकी माताजी एक शिक्षिका हैं। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल (पुष्प विहार) से पूरी की। वह साल 2016 बैच की छात्रा रही हैं।

परदादा की विरासत: उनके परदादा भी सेना में रहे थे और उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने रितिका के मन में देश सेवा का जुनून भरा।

कड़ी मेहनत से भारतीय सेना में चयन

स्कूल पूरा करने के बाद कैप्टन रितिका का पूरा ध्यान भारतीय सेना में अधिकारी बनने के सपने पर टिका था। सेना में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने ‘सेवा चयन बोर्ड’ (SSB) इंटरव्यू का सामना किया। 5 दिनों के कठिन मनोवैज्ञानिक, शारीरिक परीक्षण और मेडिकल टेस्ट को पास करके उनका चयन हुआ। ऑफिसर ट्रेनिंग अकादमी (OTA), चेन्नई से कठोर ट्रेनिंग पूरी कर वे सेना में अधिकारी बनीं और ‘कोर ऑफ सिग्नल्स’ में शामिल हुईं।

कड़ा मुकाबला: कर्तव्य पथ का सफर

गणतंत्र दिवस की परेड में ‘कोर ऑफ सिग्नल्स’ का नेतृत्व पाना बहुत बड़े सैन्य सम्मान की बात होती है। रितिका ने 2025 में गणतंत्र दिवस की परेड में ‘कोर ऑफ सिग्नल्स’ की अगुवाई की। जबलपुर स्थित ‘सिग्नल ट्रेनिंग सेंटर’ में परेड कमान के लिए एक आंतरिक चयन प्रतियोगिता हुई। इसमें 12 सबसे काबिल अधिकारियों के नाम चुने गए थे। मूल्यांकन के पैमाने बहुत सख्त थे। सेलेक्शन करने वाले अफसरों ने इन 12 अधिकारियों की कमांड वॉयस (आवाज का रोब), चलने की चाल, शारीरिक मजबूती और 146 जवानों से तालमेल बैठाने की क्षमता का बारीक मूल्यांकन किया।

कैप्टन रितिका ने अपनी 180 सेंटीमीटर (लगभग 5 फीट 11 इंच) की शानदार लंबाई और रोबीले सैन्य व्यक्तित्व के दम पर सबको पीछे छोड़ दिया। वह 146 पुरुष सैनिकों के उस विशाल दस्ते को लीड करने वाली अकेली महिला अधिकारी बनीं।

लाल किले पर बड़ी जिम्मेदारी

कैप्टन रितिका वर्तमान में सेना की 15 इंफैंट्री डिवीजन सिग्नल रेजीमेंट में तैनात हैं। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कैप्टन रितिका खरेता ने दिल्ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रहकर तिरंगा फहराने में मदद की। स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर के आधिकारिक कार्यक्रम में ऐन मौके पर कर्तव्य सौंपे जाने के बावजूद उन्होंने बिना किसी झिझक के कमान संभाली।

लाल किले पर ध्वजारोहण कोई साधारण काम नहीं होता। इसमें 21 तोपों की सलामी, राष्ट्रगान की शुरुआत और झंडे की रस्सियों को खींचने के बीच 1-1 सेकंड का सटीक तालमेल बैठाना होता है। कैप्टन रितिका ने प्रधानमंत्री के साथ खड़े होकर इस पूरे प्रोटोकॉल को बिना किसी चूक के सफलतापूर्वक पूरा किया।

बदलती सेना और नई पहचान

कैप्टन रितिका खरेता का यह सफर सिर्फ एक अधिकारी की कहानी नहीं है। यह एक आम परिवार की बेटी का अपनी मेहनत, लगन और काबिलियत से देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय मंचों कर्तव्य पथ और लाल किला पर इतिहास रचने का जीवंत उदाहरण है।