सोनपुर DRM अमित सरन ने दिखाई संवेदनशीलता, स्पेशल रेल निरीक्षण ट्रेन से दिलाई परीक्षा

पूर्व मध्य रेलवे के सोनपुर रेल मंडल में प्रशासनिक संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता का एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। पैसेंजर ट्रेन के लेट होने से 40 से अधिक अभ्यर्थियों की प्रतियोगी परीक्षा छूटने की स्थिति बन गई थी। सोनपुर के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अमित सरन ने कड़े सरकारी नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल […]

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ट्रेन में तकनीकी खराबी

यह पूरा मामला सोनपुर रेल मंडल के मुख्य मार्ग से जुड़ा हुआ है। राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने के लिए तड़के विभिन्न ग्रामीण और शहरी इलाकों से 40 से अधिक छात्र-छात्राएं सोनपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। इन सभी अभ्यर्थियों को ट्रेन पकड़कर परीक्षा केंद्र वाले संबंधित शहरों तक समय पर पहुंचना था।

अमित सरन, डीआरएम, सोनपुर

तय समय सारणी के अनुसार अभ्यर्थियों का स्टेशन पहुंचना सही था, लेकिन अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण संबंधित पैसेंजर ट्रेन अपने निर्धारित समय से काफी देरी से चल रही थी। स्टेशन पर जब ट्रेन के अत्यधिक विलंब से चलने की सूचना प्रसारित की गई, तो अभ्यर्थियों के सामने परीक्षा छूटने का सीधा संकट पैदा हो गया।

स्टेशन पर उपजा संकट

सोनपुर और आसपास के क्षेत्रों से आए अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा केंद्र तक पहुंचने का सबसे सुलभ और मुख्य साधन रेलवे ही था। सड़क मार्ग से तुरंत दूसरे वाहनों का इंतजाम करना संभव नहीं था। इसके अलावा, अचानक से निजी गाड़ियां किराए पर लेना कई साधारण पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों के लिए आर्थिक रूप से भी संभव नहीं था।

ट्रेन कब तक आएगी, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी। समय तेजी से निकल रहा था और परीक्षा छूटने की आशंका से अभ्यर्थी काफी तनाव में आ गए। प्लेटफॉर्म पर असमंजस का माहौल बन गया। अपनी महीनों की मेहनत बेकार होते देख कई अभ्यर्थी परेशान हो गए और स्टेशन परिसर में मौजूद रेलकर्मियों से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग करने लगे।

मौके पर पहुंचे डीआरएम

प्लैटफॉर्म पर अभ्यर्थियों की भीड़ और उनकी परेशानी को देखकर डीआरएम अमित सरन ने अपना तय निरीक्षण कार्यक्रम तुरंत रोक दिया। वे सीधे अभ्यर्थियों के पास गए और स्थिति की पूरी जानकारी ली। अभ्यर्थियों ने उन्हें बताया कि पैसेंजर ट्रेन लेट होने की वजह से वे समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाएंगे और उनकी परीक्षा छूट जाएगी।

नियमों पर भविष्य भारी

इस परिस्थिति में डीआरएम के सामने एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती थी। रेलवे के कड़े सुरक्षा नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी के विशेष निरीक्षण यान (सलून) में आम यात्रियों या बाहरी व्यक्तियों को ले जाने की अनुमति नहीं होती है। इस नियम का पालन कराना प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा होता है और इसमें किसी भी बदलाव के लिए लंबी कागजी प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।

हालांकि, अभ्यर्थियों के करियर और समय की कमी को देखते हुए डीआरएम अमित सरन ने कागजी प्रक्रियाओं के स्थान पर ‘प्रशासनिक संवेदनशीलता’ को प्राथमिकता दी। उन्होंने माना कि नियमों की कठोरता से ज्यादा जरूरी परीक्षार्थियों का भविष्य बचाना है। उन्होंने बिना समय गंवाए निर्णय लिया और सभी 40 से अधिक अभ्यर्थियों को अपने निरीक्षण यान में सवार होने का निर्देश दिया।

कंट्रोल रूम को निर्देश

सभी अभ्यर्थियों के ट्रेन में सवार होते ही डीआरएम अमित सरन ने सोनपुर रेल मंडल के कंट्रोल रूम से तुरंत संपर्क किया। उन्होंने कंट्रोलर को इस निरीक्षण यान को विशेष प्राथमिकता (हाई प्रायोरिटी) पर चलाने के स्पष्ट निर्देश दिए।

आदेश दिए गए कि ट्रेन के रास्ते में आने वाले सभी सिग्नलों को पूरी तरह क्लीयर रखा जाए ताकि गाड़ी बिना किसी अनावश्यक ठहराव के सीधे गंतव्य की ओर बढ़े। कंट्रोल रूम ने भी तुरंत कार्रवाई की और मुख्य लाइन पर चलने वाली अन्य सामान्य ट्रेनों के परिचालन को समायोजित करते हुए इस निरीक्षण ट्रेन को नॉन-स्टॉप रन के लिए रास्ता दिया।

समय पर पहुंचे केंद्र

निरीक्षण ट्रेन के माध्यम से सभी अभ्यर्थियों को उस स्टेशन तक पहुंचाया गया, जो उनके परीक्षा केंद्रों के सबसे समीप स्थित था। ट्रेन के तेज और निर्बाध परिचालन के कारण अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार बंद होने से काफी पहले ही सुरक्षित स्टेशन पर उतर गए।

स्टेशन पर उतरने के बाद अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली और समय रहते अपने-अपने परीक्षा केंद्रों में प्रवेश किया। इस त्वरित मदद के कारण सभी अभ्यर्थी बिना किसी बाधा के अपनी परीक्षा में शामिल हो सके। परीक्षा समाप्त होने के बाद अभ्यर्थियों ने डीआरएम अमित सरन की इस प्रशासनिक पहल के प्रति औपचारिक रूप से आभार जताया।

प्रशासनिक तत्परता की मिसाल

यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों की संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। सरकारी नियमों का पालन आवश्यक होता है, लेकिन जब स्थिति आपातकालीन हो और आम नागरिकों का भविष्य दांव पर लगा हो, तो व्यावहारिक और जनहितैषी निर्णय लेना ही कुशल प्रशासन की पहचान है।

डीआरएम अमित सरन द्वारा उठाए गए इस कदम की रेल महकमे और आम जनता के बीच सराहना हो रही है। रेल अधिकारियों का भी मानना है कि कड़े प्रोटोकॉल के बीच जनहित और संवेदनशीलता को प्राथमिकता देना ही सच्चे अर्थों में लोक सेवा का मूल उद्देश्य है।