स्कूल में छात्राओं संग खाया खाना, जानिए जमीनी हकीकत पर भरोसा करने वाली IAS का सफर

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, धर्मनगरी के औचक निरीक्षण के दौरान अपनी सादगी और तुरंत फैसला लेने के अंदाज को लेकर चर्चा में आई हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने केवल अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया। वे खुद स्कूल की बालिकाओं के बीच […]

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की जिलाधिकारी (DM) जसजीत कौर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, धर्मनगरी के औचक निरीक्षण के दौरान अपनी सादगी और तुरंत फैसला लेने के अंदाज को लेकर चर्चा में आई हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने केवल अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया। वे खुद स्कूल की बालिकाओं के बीच पहुंचीं। उन्होंने छात्राओं के साथ बैठकर भोजन किया। निरीक्षण के दौरान जब उन्हें पता चला कि स्कूल की एक तरफ की बाउंड्रीवाल काफी समय से गिरी हुई है, तो उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तुरंत निर्माण कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए।

बिजनौर की जिलाधिकारी जसजीत कौर जिले में चल रही सरकारी योजनाओं और आवासीय स्कूलों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अक्सर औचक निरीक्षण पर निकलती हैं। इसी कड़ी में वे विकासखंड मोहम्मदपुर देवमल क्षेत्र स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, धर्मनगरी पहुंची थीं।

फैसला ऑन द स्पॉट

जब जिलाधिकारी स्कूल पहुंचीं, उस समय छात्राएं अपनी अंग्रेजी विषय की परीक्षा देकर हटी थीं। वे सीधे कक्षाओं में गईं और बच्चियों से पढ़ाई के माहौल, शिक्षकों की उपस्थिति और स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

इसके बाद उन्होंने विद्यालय की वार्डन से बालिकाओं के रोजाना के भोजन और मेन्यू के बारे में पूछा। वार्डन ने बताया कि सुबह नाश्ते में फल और दूध दिया जाता है। दोपहर के खाने में दाल, चावल, रोटी, सब्जी, रायता और सलाद मिलता है। शाम के समय चाय, बिस्किट, चने और परमल दिए जाते हैं, जबकि रात का खाना शाम सात बजे परोसा जाता है।

जिलाधिकारी ने किचन के सामने बने बरामदे में तैयार हो रहे खाने और बर्तनों की सफाई का खुद निरीक्षण किया। उन्होंने रसोइयों को सख्त निर्देश दिए कि खाने को हमेशा ढंककर रखा जाए और सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए। भोजन की गुणवत्ता और स्वाद जांचने के लिए वे अधिकारियों को छोड़कर सीधे छात्राओं के बीच बैठ गईं। खाना शुरू करने से पहले उन्होंने छात्राओं संग प्रार्थना की और फिर उनके साथ बैठकर खाना खाया।

बातचीत के दौरान उन्होंने बच्चियों से पूछा कि “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कौन हैं?” इस पर सभी छात्राओं ने एक साथ “योगी आदित्यनाथ” का नाम लिया। जिलाधिकारी ने बच्चियों की तारीफ की और उन्हें रोज फल खाने, खाने से पहले हाथ धोने और ध्यान लगाकर पढ़ाई करने की सलाह दी।

निरीक्षण के दौरान जब उन्हें पता चला कि स्कूल की एक तरफ की बाउंड्रीवाल गिरी हुई है, तो उन्होंने मौके पर मौजूद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और विभागीय अधिकारियों को तुरंत बाउंड्रीवाल का निर्माण कार्य शुरू कराने का आदेश दिया।

अमृतसर में बीता बचपन

जसजीत कौर मूल रूप से पंजाब के अमृतसर शहर की रहने वाली हैं। उनका जन्म 14 अक्टूबर 1984 को हुआ था। वे बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार थीं।

उनकी शुरुआती और माध्यमिक स्कूली शिक्षा अमृतसर से ही पूरी हुई। स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर से संबद्ध बीबीके डीएवी कॉलेज में दाखिला लिया। वहां से उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की।

ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाते हुए मद्रास यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु से कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया।

2012 में बनीं IAS अफसर

पढ़ाई पूरी करने के बाद जसजीत कौर ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। उन्होंने अपने विषयों की मजबूत पकड़ और नियमित अध्ययन के बल पर परीक्षा दी।

साल 2011 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उन्हें बड़ी सफलता मिली। उन्होंने पूरे देश में 291वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की।

इस सफलता के बाद उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चुना गया। केंद्र सरकार ने उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर और 2012 बैच आवंटित किया। चयन के बाद उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में अपना प्रशासनिक प्रशिक्षण पूरा किया।

पहली पोस्टिंग से बिजनौर तक का सफर

वर्ष 2012 में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद आईएएस जसजीत कौर ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों और शासन के महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली मैदानी तैनाती उन्नाव जिले में जॉइंट मजिस्ट्रेट के रूप में हुई। यहां उन्होंने जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों को हल करने का व्यावहारिक अनुभव लिया।

इसके बाद उन्हें बुलंदशहर जिले का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया, जहां उन्होंने ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़ी योजनाओं पर काम किया।

उनकी प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए शासन ने उन्हें उत्तर प्रदेश योजना विभाग में विशेष सचिव बनाया। इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM UP) में मिशन निदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों की स्थिति सुधारने का काम किया।

जसजीत कौर बिजनौर से पहले उत्तर प्रदेश के दो जिलों—शामली और सुल्तानपुर में जिलाधिकारी (DM) के रूप में तैनात रह चुकी हैं। शामली में उनका कार्यकाल जनसमस्याओं के जल्द समाधान और पारदर्शी प्रशासन के लिए जाना गया।जसजीत कौर बिजनौर से पहले उत्तर प्रदेश के दो जिलों—शामली और सुल्तानपुर में जिलाधिकारी (DM) के रूप में तैनात रह चुकी हैं। शामली में उनका कार्यकाल जनसमस्याओं के जल्द समाधान और पारदर्शी प्रशासन के लिए जाना गया।

शासन ने 16 जनवरी 2025 को उन्हें बिजनौर जिले का जिलाधिकारी एवं कलेक्टर नियुक्त किया। पदभार संभालने के बाद से ही वे जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए लगातार सक्रिय हैं।

जमीनी हकीकत से वास्ता

सरकारी कामों में इस्तेमाल होने वाले सामान की गुणवत्ता, स्कूलों में मिड-डे मील की स्वच्छता और अस्पतालों में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं पर वे पैनी नजर रखती हैं। कहीं भी कमी मिलने पर वे तुरंत जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करती हैं।

बिजनौर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में छात्राओं संग जमीन पर बैठकर खाना खाना, प्रार्थना में शामिल होना और टूटी बाउंड्रीवाल को तुरंत बनवाने का आदेश देना उनकी इसी कर्तव्यनिष्ठ और संवेदनशील कार्यशैली को दिखाता है।

  • IAS IPS
  • UPSC